धर्म संसार: धर्मों रक्षित रक्षति:भारतीय संस्कृति का महान महापर्व : रक्षा बंधन महापर्व, 19 अगस्त, 2024.

भैया तू जुग -जुग जिये, भरे रहे भण्डार |मनभावन तुझको मिले, खुशियों का संसार || भैया मेरे है मुझे , तुझपे पूरण गर्व|मन के बन्धन जोड़ता , यह राखी का…

गुरुवर मोरी विनती सुन लोकरौं विनय कर जोरी..तोरे कर में बांधना चाहौंस्नेह कि मैं एक डोरी…!!

मोरा मन तो तव चरणन काकरत सदा अभिनन्दन..बांध मोरे कर सूत का धागाकर दो #रक्षाबन्धन..!!:तव चरणन की धूर समेटौंमाथे तिलक लगाऊँ..निज श्रद्धा को धागा करकेतोरे कर पहिराऊँ..!! अउर न मन…

🙏 ।। जय महाकाल।। 🙏🙏श्री शिवाय नमस्तुभ्यं 🙏भगवान महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग आज का भस्म आरती शृंगार दर्शन18 अगस्त 24 ( रविवार)🔱

🙏पवित्र श्रवण माह की हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएं, भोलेबाबा सबका कल्याण और मनोकामना पूर्ण करे।🙏🌷जय भोले🌷🙏

श्री पिपलेश्वर महादेव जी का आज का श्रृंगार दर्शन भोपाल मध्यप्रदेश

प्रदेश वासियों को 78वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं!माँ भारती की स्वाधीनता के महायज्ञ में स्वयं की आहुति देने वाली सभी हुतात्माओं को कोटि-कोटि नमन!होंअपने अमर बलिदानियों के सपनों के भारत का निर्माण हम सभी की शीर्ष प्राथमिकता है।आइए, आज के पावन दिन हम सभी ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत, विकसित भारत-आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण के लिए संकल्पित हों।वंदे मातरम्, जय हिंद!

धर्म संसार: धर्मो रक्षति रक्षितःभारतीय संस्कृति का महापर्व- हरयाली तीज महापर्वपौराणिक महत्व : पौराणिक साक्ष्यों के अनुसार कहा जाता है कि इस महापर्व पर अर्थात् इस दिन, परम् श्रेध्य परम् पूजनीय माता पार्वती जी सैकड़ों वर्षों की कठोर आराधना के उपरांत देवों के देव परम् श्रेध्य महादेव जी भगवान् श्री शिव से मिलने की तपस्या संपूर्ण हुई थीं। कहा जाता हैं कि पौराणिक साक्ष्य यह भी है कि परम् श्रेध्य माता पार्वती जी ने भगवान श्री शिव जी को परम् पूजनीय श्रीपति स्वरूप में पाने के लिए 107 बार जन्म लिया फिर भी परम् श्रेध्य माता जी को श्रीपति के रूप में परम् पूज्य भगवान शिव जी की प्राप्ति न हो सकी। पौराणिक तथ्यों के अनुसार 108 वीं बार माता पार्वती जी ने जब जन्म लिया तब श्रावण मास की शुक्ल पक्ष तृतीया को परम् श्रेध्य परम् पूजनीय भगवन श्री शिव जी श्रीपति स्वरूप में प्राप्ति हो सकी। तभी से इस महापर्व का शुभारम्भ माना गया हैं। इस महापर्व पर पर जो सुहागन महिलाएँ सोलह श्रृंगार करके परम् श्रेध्य एवं परम् पूजनीय श्री शिव – पार्वती जी की पूजा करती हैं, उनका सुहाग दीर्घायु अर्थात् लम्बी अवधि तक बना रहता है। साथ ही परम् श्रेध्य देवी पार्वती जी के कहने पर देवों के देव महादेव श्री श‌िव जी ने आशीर्वाद द‌िया क‌ि जो भी कुंवारी कन्या इस व्रत को रखेगी और श्री श‌िव- पार्वती जी की पूजा करेगी उनके व‌िवाह में आने वाली बाधाएँ स्वतः ही दूर होंगी साथ ही साथ सुन्दर और सुयोग्य वर की प्राप्त‌ि होगी। सुहागन नारियों को इस महापर्व से अतिउत्तम सौभाग्य की प्राप्त‌ि होगी और लंबे समय तक परम् श्रेध्य श्रीपत‌ि के साथ वैवाह‌िक जीवन की प्रत्येक मनोकामना को प्राप्त करेगी। इसल‌िए कुंवारी और सुहागन दोनों ही इस महापर्व को बड़ी श्रद्धा से रखना चाहिए। सभी बहिनों को चाहिए कि इस महापर्व पर निम्न मंत्र का जाप कर घर परिवार में अति उत्तम सुख-समृद्धि और अति उत्तम फल की प्राप्ति की भागीदार बनें।

“गण गौरी शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकर प्रिया।मां कुरु कल्याणी कांत कांता सुदुर्लभाम्।।” इस मंत्र से परम् श्रेध्य भगवान श्री शिव जी तथा माता पार्वती जी अति प्रसन्न होकर तत्काल ही…

सूत्रों के हवाले से धर्मों रक्षति पखण्डी बाबाओं और चौकीदारों का ड्रामा

( कोई श्री श्री बना हुआ है कोई सद्गुरु कोई आचार्य प्रशांत सबने धर्म ग्रन्थों की धज्जियां उड़ा दी है मिलावटी बातें बना बना कर और पंद्रह पंद्रह बीस बीस…

????????जय माँ राज राजेश्वरी ????????आओ जाने अंक ज्योतिष ????????मूलांक 1 के बारे में

शुभ शुभ दिनांक- 1, 10, 19, 28 मित्र- 2, 3, 7, 9 स्वामी ग्रह- सूर्य शुभ रत्न- माणिक्य शुभ धातु- सोना भाग्यशाली दिन- शुक्रवार और रविवार शुभ अंक- 1, 10,…

प्रेत श्राप एवं उपाय

प्रेत श्राप एवं उपाय किसी व्यक्ति की कुंडली में यदि पंचम भाव में शनि तथा सूर्य हों और सप्तम भाव में कमजोर चंद्रमा स्थित हो तथा लग्न में राहु, बारहवें…

???????? हर हर महादेव???????????? ~ वैदिक पंचांग ~ ????**????️ दिनांक – 25 जून 2024????️ दिन – मंगलवार????️ विक्रम संवत – 2081 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2080)????️ शक संवत -1946????️ अयन – दक्षिणायन????️ ऋतु – वर्षा ॠतु????️ मास-आषाढ (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार ज्येष्ठ)????️ पक्ष – कृष्ण????️ तिथि – चतुर्थी रात्रि 11:10 तक तत्पश्चात पंचमी????️ नक्षत्र – श्रवण दोपहर 02:32 तक तत्पश्चात धनिष्ठा????️ योग – वैधृति सुबह 09:06 तक तत्पश्चात विष्कंभ????️ राहुकाल – शाम 04:03 से शाम 05:43 तक???? सूर्योदय-06:00????️ सूर्यास्त- 19:22???? दिशाशूल – उत्तर दिशा में???? व्रत पर्व विवरण – संकष्ट चतुर्थी ( चन्द्रोदय:रात्रि 10:24),अंगारकी चतुर्थी,मंगलवारी चतुर्थी (सूर्योदय से रात्रि 11:10 तक),पंचक [आरम्भ:रात्रि 01:49 (26 जून 01:49 AM)]???? विशेष – चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)???? ~ वैदिक पंचांग ~ ????**???? मंगलवारी चतुर्थी ????➡️ 25 जून 2024 मंगलवार को सूर्योदय से रात्रि 11:10 तक मंगलवारी चतुर्थी है ।???? मंत्र जप व शुभ संकल्प की सिद्धि के लिए विशेष योग???????? मंगलवारी चतुर्थी को किये गए जप-संकल्प, मौन व यज्ञ का फल अक्षय होता है ।???????? मंगलवार चतुर्थी को सब काम छोड़ कर जप-ध्यान करना … जप, ध्यान, तप सूर्य-ग्रहण जितना फलदायी है…???? ~ वैदिक पंचांग ~ ????**प्रतिदिन तुलसी का पूजन करना और पौधे में जल अर्पित करना हमारी प्राचीन परंपरा है। जिस घर में प्रतिदिन तुलसी की पूजा होती है, वहां सुख-समृद्धि, सौभाग्य बना रहता है। धन की कभी कोई कमी महसूस नहीं होती। अत: हमें विशेष तौर पर प्रतिदिन तुलसी का पूजन अवश्य करना चाहिएतुलसी के पौधे के सूखने के बाद भी इसकी पवित्रता समाप्त नहीं होती है। ऐसे में पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ तुलसी के पौधे को किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए।‪???? *चतुर्थी‬ तिथि विशेष* ???????????? चतुर्थी तिथि के स्वामी ‪भगवान गणेश‬जी हैं।???? हिन्दू कैलेण्डर में प्रत्येक मास में दो चतुर्थी होती हैं।???????? पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्ट चतुर्थी कहते हैं।अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं।???????? शिवपुराण के अनुसार “महागणपतेः पूजा चतुर्थ्यां कृष्णपक्षके। पक्षपापक्षयकरी पक्षभोगफलप्रदा ॥➡ “ अर्थात प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि को की हुई महागणपति की पूजा एक पक्ष के पापों का नाश करनेवाली और एक पक्षतक उत्तम भोगरूपी फल देनेवाली होती है ।???? ~ वैदिक पंचांग ~ ????**???? कोई कष्ट हो तो ???????????? हमारे जीवन में बहुत समस्याएँ आती रहती हैं, मिटती नहीं हैं ।, कभी कोई कष्ट, कभी कोई समस्या | ऐसे लोग शिवपुराण में बताया हुआ एक प्रयोग कर सकते हैं कि, कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (मतलब पुर्णिमा के बाद की चतुर्थी ) आती है | उस दिन सुबह छः मंत्र बोलते हुये गणपतिजी को प्रणाम करें कि हमारे घर में ये बार-बार कष्ट और समस्याएं आ रही हैं वो नष्ट हों |???????? छः मंत्र इस प्रकार हैं –???? ॐ सुमुखाय नम: : सुंदर मुख वाले; हमारे मुख पर भी सच्ची भक्ति प्रदान सुंदरता रहे ।???? ॐ दुर्मुखाय नम: : मतलब भक्त को जब कोई आसुरी प्रवृत्ति वाला सताता है तो… भैरव देख दुष्ट घबराये ।???? ॐ मोदाय नम: : मुदित रहने वाले, प्रसन्न रहने वाले । उनका सुमिरन करने वाले भी प्रसन्न हो जायें ।???? ॐ प्रमोदाय नम: : प्रमोदाय; दूसरों को भी आनंदित करते हैं । भक्त भी प्रमोदी होता है और अभक्त प्रमादी होता है, आलसी । आलसी आदमी को लक्ष्मी छोड़ कर चली जाती है । और जो प्रमादी न हो, लक्ष्मी स्थायी होती है ।???? ॐ अविघ्नाय नम:???? ॐ विघ्नकरत्र्येय नम:???? विशेष – 25 जून 2024 मंगलवार को संकष्ट चतुर्थी (चन्द्रोदय रात्रि 10:24)**पंचक

26 जून 2024, सुबह 01.49 – 30 जून 2024, सुबह 07.34 एकादशी 2 जुलाई 2024- योगिनी एकादशी17 जुलाई 2024- देवशयनी एकादशी प्रदोष 03 जुलाई 2024 बुधवार सौम्यवारा प्रदोष व्रत (कृष्ण)18…