सूत्रों के हवाले से धर्मों रक्षति पखण्डी बाबाओं और चौकीदारों का ड्रामा

  1. माला कैसे पकड़नी है ये नही आता माला उठानी कैसे है ये नही पता माला उठाते समय क्या उच्चारण करना है ये नही पता माला रखते समय क्या मन्त्र पढ़ना है ये नही पता माला छुपानी है दिखानी नही ये भी पाखण्डियों को नही पता
  2. आसन पर बैठने के नियम नही पता आसन को जगाने के नियम नही पता सुरक्षा चक्र कैसे लगते है कितने प्रकार के सुरक्षा चक्र सनातन धर्म में ऋषि प्रदत्त है नही आता
  3. शरीर शुद्धि का कुछ अता पता नही देवता के सामने सिंहासन पर या किसी ऊंचे स्थान पर नही बैठते ये गधे ये भी नही जानते देवता के सामने न तो सर हिला हिलाकर मानसिक रोगी जैसा व्यवहार किया जाता न भाँड़ की तरह नृत्य होता है न ही हल्ले मचाये जाते और भी बहुत नियम है वो सब ये पालन नही करते
  4. किसी भी श्मशान साधना हवन यज्ञ कर्मकांड की कोई फोटो या वीडियो डालना वर्जित है पर ये पाखण्डी सब डालते है धंधे के लिए
  5. कोई बाबा ठुमके लगा लगाकर नाचता है कोई कथावाचक कोई चौकी वाला आदमी से औरत बनकर बैठ जाता है जो एकदम वेद विरुद्ध है देवी भागवत में भी आया है कलियुग में पनपे ऐसे नकली धर्म और नकली तन्त्र वाले भैरव कपालिक सिर्फ भ्रमित करने को ही बने है मतलब वेद मार्ग से हटाने को
  6. इसके आगे बहुत सारी मुर्खिनी ओझा तँत्र चुड़ैल विद्या डायन विद्या तिब्बती तँत्र बौद्ध तँत्र सिखाकर 15 से 30 साल के लड़के लड़कियों को नरक में भेजने में लगी है
  7. ये सब ड्रामा शुरू होता है पंजाब से जो दिल्ली नोयडा उत्तर प्रदेश उत्तराखंड के कुछ जिलों के साथ साथ पूरे देश में फैल जाता है दरबार लगा लगाकर पाखण्डी बैठे है

( कोई श्री श्री बना हुआ है कोई सद्गुरु कोई आचार्य प्रशांत सबने धर्म ग्रन्थों की धज्जियां उड़ा दी है मिलावटी बातें बना बना कर और पंद्रह पंद्रह बीस बीस पच्चीस पच्चीस साल के लौंडे इनके चेले चपाटे बने घूमते है

मुरारी बापू अली मौला वाला उसने और श्री श्री वाले मेडिटेशन गुरूजी ने तो बच्चों से लेकर बड़े बड़े उम्र के लोगों तक को ऐसा नव बौद्ध नव हिन्दू बनाकर सत्यानाश किया है क्या कहा जाये

श्री श्री और मुरारी बापू या सद्गुरु जैसे लोग इनका कोई न तो वैष्णव परम्परा का गुरु है न शिव परम्परा का न शाक्त का न कौलाचार का या वैदिक परंपरा से इनका लेना देना है ये मनमुखी लोग है सैकड़ों प्रमाण है वेद से पुराण से उपनिषद से ये लोग सब काम धर्म विरुद्ध और जनता को मूर्ख बनाने का करते है जैसे कि बौद्ध धर्मियों के विदेशियों के बनाये हुए ध्यान ये लोग सिखाते है मूर्ख हिन्दू अंधे बनकर सीखने लगते है

समाधि में जाना और समाधिस्थ होना इनमें से किसी को नही आता वो सिर्फ सनातनधर्म में दिए गए पतंजलि सूत्र योग शास्त्र शिव सूत्र आदि में ही होता है तो ये कुण्डलिनी जागरण और ध्यान के नाम पर लोगों के आज्ञा चक्र को एक्टिव करके छोड़ देते है इससे होता ये है आज्ञा चक्र के खुलने पर ब्रह्मांड की सारी शक्ति खासकर आस पास की नकारात्मक भूत प्रेत चुड़ैल डायन बुरी शक्तियां जिन्न पिशाच आदि आज्ञा चक्र में आकर बैठने लगते है रूप बदल बदलकर और मूर्ख लोग सोचते है देवता के दर्शन हो गए।

मेरे कद्दू के दर्शन हुए जब यही देवता भूत प्रेत घर में तांडव करते है या लोगों को मारते है तब ऐसे अंधभक्तों की ऐसी तैसी होती है फिर ये पंडितों के साधकों के पास भागते फिरते है हाय हाय करते

मुरारी भोंपू सद्गुरु ब्रह्मकुमारी और श्री श्री से जुड़े हुए कई परिवारों की अंत में मैंने ऐसी दुर्गति होती देखी है कि लोग सड़क तक पर आ गये वजह साफ थी वेद विरुद्ध कर्म से पहले ये लोग कर्मसंकर बनते है फिर वर्णसंकर जिससे इनके पितृ कुपित होते है ग्रह भी खराब होते है फिर कुलदेवता और कुलदेवी कुपित होकर पूरे वंश का ही पतन कर देते है

इसीलिये कोई चौकी वाला हो या कोई बाबा सबको छोड़कर तुम एक मात्र शंकराचार्य जी या वैष्णव सम्प्रदाय के गुरुओं शैव सम्प्रदाय के पुरातन गुरुओं या शाक्त और गाणपत्य गुरुओं को ही पकड़ लो या वैदिक रूप से अपने कुल वेद शाखा वर्ण अनुसार ही पूजा पाठ ही करने लगो इन जैसे धर्म द्रोहियों के पास जाना नही पड़ेगा वरना तो अंततोगत्वा कुछ नही बचेगा इसमें रत्ती भर भी संशय नही है थोक के भाव में भरे पड़े ये दुकान चलाने वाले धंधेबाज़ और जनता का पैसा खाने वाले बाबा नकली कथावाचक चौकी वाले जो बहुत थोड़ा सा अध्यात्मिक तेज और सत्य बचा हुआ है उसे भी अपने अंधकार से भरे अज्ञान और झूठ में गायब कर देंगे और फिर कुछ नही बचेगा तुम्हारे पास सिवाय झूठ के इनसे सावधान रहो और अपनी कुल परम्परा गुरु परम्परा को जानो किसी ब्रांडेड बाबा और चौकी वाले ड्रामेबाज़ को मत पकड़ो )

जय भवानी शिव शंकर
जय लक्ष्मी नारायण????

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