मोरा मन तो तव चरणन का
करत सदा अभिनन्दन..
बांध मोरे कर सूत का धागा
कर दो #रक्षाबन्धन..!!
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तव चरणन की धूर समेटौं
माथे तिलक लगाऊँ..
निज श्रद्धा को धागा करके
तोरे कर पहिराऊँ..!!

अउर न मन कुछ अभिलाषा
एक इच्छा है मोरी…
तोरे कर मे बांधना चाहूं
स्नेह कि मैं एक डोरी…!!
ना सोने चांदी की राखी
ना रेशम का धागा..
मैं तो तेरो दास अकिंचन
बस मन तोसे लागा..!!
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मोरे मन की पर्ण कुटी में
बस हरि की है मूरत…
बरबस हरि ही दिख जाते हैं
देखूं तेरी सूरत…!!
लागत है गुरु हर क्षण देखौं
केवल सूरत तोरी..
तोरे कर में बांधन चाहौं
स्नेह कि मैं एक डोरी..!!
🙏 🪷 🙏
सादर साष्टांग दण्डवत प्रणाम गुरुदेव
पं अनिल भट्ट भारद्वाज
