भैया तू जुग -जुग जिये, भरे रहे भण्डार |
मनभावन तुझको मिले, खुशियों का संसार ||

भैया मेरे है मुझे , तुझपे पूरण गर्व|
मन के बन्धन जोड़ता , यह राखी का पर्व||
पवित्र पावन भारतीय संस्कृति का अत्यंत अनमोल और वैभवशाली स्वर्णिम इतिहास संपूर्ण दुनिया के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रेरणा स्रोत हैं| इसके मूलमंत्रों में ही अत्यंत वैभवशाली मानवता के समस्त गुण छिपे हुए हैं जो सारी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ मार्गदर्शन के लिए अति महत्व पूर्ण है| रक्षा बंधन महापर्व भी भारतीय संस्कृति का अनमोल महापर्व हैं जो सदियों से बड़े हर्षोल्लास के साथ संपूर्ण राष्ट्र में मनाया जाता हैं| यदि आप वैदिक तरीके से रक्षाबंधन मनाना चाहते हैं तो सर्वप्रथम रक्षासूत्र को अपने गुरुदेव के चरणों में समर्पित करके अपना दैनिक पूजनविधि सम्पन्न करें, उसके पश्चात बड़ी श्रद्धा से आरती करके, तिलक चंदन लगाकर जब आप रक्षा सूत्र को बांधे तो इन मंत्रों का भी अवश्य उच्चारण करें और उसके भावार्थ को भी स्मरण करें। सिर्फ हम ही बोलते रहेंगे और आप सिर्फ सुनेंगे ऐसा नहीं चलेगा, आइये हमारे साथ आप भी मंत्र उच्चारण कीजिये और इसको याद भी कर लीजिये- मंत्र इस प्रकार है-
येन बद्धो बलि राजा, दानवेंद्रो महाबलः।
तेन त्वाम् प्रतिबध्नामि, रक्षे मा चल मा चल।।
उत्तम मंत्र का भावार्थ – इसका भावार्थ है कि जिस रक्षा सूत्र से दानवों के राजा महाबली बलि बांधे गए थे उसी रक्षा सूत्र से मैं आज तुम्हें बांधती हूँ। यह तुम्हारी रक्षा करेगा। हे रक्षे! (रक्षासूत्र) तुम चलायमान न हो, चलायमान न हो अर्थात स्थिर रहना, स्थिर रहना।
दूसरा अनमोल मंत्र है- आप रक्षा सूत्र बांधते समय स्वस्तिवाचन के इस मंत्र का भी उच्चारण कर सकते हैं-
ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः।
स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु।। (ऋग्वेद 01/89/06)
भावार्थ – इसका भावार्थ है हे इंद्रदेव! आप महान कीर्ति को धारण करने वाले हैं हमारा कल्याण करें। हे पुष्यदेव! संपूर्ण विश्व में ज्ञान के स्वरूप आप हैं। आपका अस्त्र अटूट है। हे गरुड़ देव! हे बृहस्पति देव! आप हमारा मंगल करें कल्याण करें।
हरि हरि जन के सुयश को, करो सदा गुणगान।
देव सदाफल शांति है, होय परम कल्याण।। (स्वर्वेद 04/09/50)
हे ईश्वर! अस्य बंधनस्य रक्षणं कुरु।
हे सर्वशक्तिमान ईश्वर! कृपया हमारे भाई-बहन के इस (रिश्ते) बंधन की रक्षा कीजिए।
मेरे प्रिय भाइयों और बहिनों हम हमेशा कहते हैं सोच भले ही नयी रखिये, परंतु संस्कार पूरी की पूरी दुनिया में श्री सत्य सनातन धर्म के ही सबसे अच्छे हैं, और सर्वश्रेष्ठ हैं, और इन्हीं सच्चे विचारों से हमें अपनी संस्कृति, अपनी सभ्यता, अपने संस्कारों को हमेशा हमेशा के लिए जीवंत रखना है| आइए हम सब मिलकर बड़ी श्रद्धा से बोले – हिंदी – हिंदू – हिदुस्तान |
सब मिलकर बोलो जय श्री राम – जय श्री राम ||
जय हिंद – जय भारत – जय भारतीय संस्कृति!
“ब्रह्म परम्परा कभी नष्ट न हो!”
पंडित धर्म राज यज्ञ नारायण भट्ट जी (ज्योतिषाचार्य एवं वेदपाठी )|
आभार –
पंडित राकेश कुमार कौशिक जी
(शिक्षविद्द )|
