“गण गौरी शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकर प्रिया।
मां कुरु कल्याणी कांत कांता सुदुर्लभाम्।।”
इस मंत्र से परम् श्रेध्य भगवान श्री शिव जी तथा माता पार्वती जी अति प्रसन्न होकर तत्काल ही अपने भक्त को अच्छा वर प्रदान करती है। भारतीय संस्कृति के इस महापर्व पर संपूर्ण प्राणी जगत को कोटि कोटि नमन।
“ब्रह्म परम्परा कभी नष्ट न हो।”
हर हर महादेव – हर हर महादेव
पंडित राकेश कुमार कौशिक जी
( शिक्षविद्द) मुज़फ्फरनगर।
उत्तर प्रदेश।

