धर्म संसार: धर्मो रक्षति रक्षितःभारतीय संस्कृति का महापर्व- हरयाली तीज महापर्वपौराणिक महत्व : पौराणिक साक्ष्यों के अनुसार कहा जाता है कि इस महापर्व पर अर्थात् इस दिन, परम् श्रेध्य परम् पूजनीय माता पार्वती जी सैकड़ों वर्षों की कठोर आराधना के उपरांत देवों के देव परम् श्रेध्य महादेव जी भगवान् श्री शिव से मिलने की तपस्या संपूर्ण हुई थीं। कहा जाता हैं कि पौराणिक साक्ष्य यह भी है कि परम् श्रेध्य माता पार्वती जी ने भगवान श्री शिव जी को परम् पूजनीय श्रीपति स्वरूप में पाने के लिए 107 बार जन्म लिया फिर भी परम् श्रेध्य माता जी को श्रीपति के रूप में परम् पूज्य भगवान शिव जी की प्राप्ति न हो सकी। पौराणिक तथ्यों के अनुसार 108 वीं बार माता पार्वती जी ने जब जन्म लिया तब श्रावण मास की शुक्ल पक्ष तृतीया को परम् श्रेध्य परम् पूजनीय भगवन श्री शिव जी श्रीपति स्वरूप में प्राप्ति हो सकी। तभी से इस महापर्व का शुभारम्भ माना गया हैं। इस महापर्व पर पर जो सुहागन महिलाएँ सोलह श्रृंगार करके परम् श्रेध्य एवं परम् पूजनीय श्री शिव – पार्वती जी की पूजा करती हैं, उनका सुहाग दीर्घायु अर्थात् लम्बी अवधि तक बना रहता है। साथ ही परम् श्रेध्य देवी पार्वती जी के कहने पर देवों के देव महादेव श्री श‌िव जी ने आशीर्वाद द‌िया क‌ि जो भी कुंवारी कन्या इस व्रत को रखेगी और श्री श‌िव- पार्वती जी की पूजा करेगी उनके व‌िवाह में आने वाली बाधाएँ स्वतः ही दूर होंगी साथ ही साथ सुन्दर और सुयोग्य वर की प्राप्त‌ि होगी। सुहागन नारियों को इस महापर्व से अतिउत्तम सौभाग्य की प्राप्त‌ि होगी और लंबे समय तक परम् श्रेध्य श्रीपत‌ि के साथ वैवाह‌िक जीवन की प्रत्येक मनोकामना को प्राप्त करेगी। इसल‌िए कुंवारी और सुहागन दोनों ही इस महापर्व को बड़ी श्रद्धा से रखना चाहिए। सभी बहिनों को चाहिए कि इस महापर्व पर निम्न मंत्र का जाप कर घर परिवार में अति उत्तम सुख-समृद्धि और अति उत्तम फल की प्राप्ति की भागीदार बनें।

“गण गौरी शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकर प्रिया।
मां कुरु कल्याणी कांत कांता सुदुर्लभाम्।।”

इस मंत्र से परम् श्रेध्य भगवान श्री शिव जी तथा माता पार्वती जी अति प्रसन्न होकर तत्काल ही अपने भक्त को अच्छा वर प्रदान करती है। भारतीय संस्कृति के इस महापर्व पर संपूर्ण प्राणी जगत को कोटि कोटि नमन।

“ब्रह्म परम्परा कभी नष्ट न हो।”
हर हर महादेव – हर हर महादेव

पंडित राकेश कुमार कौशिक जी
( शिक्षविद्द) मुज़फ्फरनगर।
उत्तर प्रदेश।

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