परम श्रेध्य प्रकांड महापंडित रामानुजाचार्य भट्ट जी संबंधित श्लोक:

- “श्रीमन्नारायणं नमस्कृत्य नमस्कृत्य नमो नमः। वेदान्तेश्वरं विद्यामर्थं यस्य प्रसादाद्धरेर्धते।।”
भावार्थ: श्रीमन्नारायण को नमन करते हुए, मैं उनके चरणों में नमन करता हूँ। वह वेदांत के स्वामी हैं और उनकी कृपा से ही हमें ज्ञान प्राप्त होता है।
- “रामानुजार्य पादाम्बुजे विराजमानो यः। तस्य प्रसादात्तत्सिद्धिं प्राप्नोति न संशयः।।”
भावार्थ: जोपरम श्रेध्य रामानुजाचार्य जी के चरण कमलों में विराजमान है, उसकी कृपा से हमें उनकी शिक्षाओं की सिद्धि प्राप्त होती है, इसमें कोई संदेह नहीं है।
प्रकांड महापंडित माधवचार्य भट्ट जी संबंधित श्लोक:
- “माधवो वै वेदविद्यायां वेदविद्यास्ततः परः। तस्माद्वेदविद्या प्रोक्ता माधवाचार्य्येण धीमता।।”
भावार्थ: प्रकांड महापंडित माधवाचार्य जी वेद विद्या में निपुण थे, और वेद विद्या से भी परे हैं। इसलिए, माधवाचार्य जी ने वेद विद्या की व्याख्या की है।
- “माधवाचार्य्यो वेदान्ते वेदविद्यास्ततः परः।तस्माद्वेदान्तपारङ्गतः पारङ्गतः सर्वशास्त्रः।।”
भावार्थ: माधवाचार्य वेदांत में वेद विद्या से भी परे हैं। इसलिए, वह वेदांत और सभी शास्त्रों में पारंगत हैं।
श्री भट्ट ब्राह्मण संबंधित श्लोक:
- “भट्टानां विद्याधराणां प्रवराणां प्रवर्त्तकानाम्। तेषां विद्याप्रसादेन जायते सर्वसम्पत्तिः।।”
भावार्थ: भट्ट ब्राह्मण वंश विद्वानों और विद्या के धारकों के प्रवर्तक हैं। उनकी विद्या की कृपा से हमें सभी सम्पत्तियाँ प्राप्त होती हैं।
- “भट्टब्राह्मणा वेदविद्या वेदविद्यास्ततः परः। तस्माद्वेदविद्या प्रोक्ता भट्टब्राह्मणैः परं पदम्।।”
भावार्थ: श्रीभट्ट ब्राह्मण वंश वेद विद्या में निपुण हैं और वेद विद्या से भी परे हैं। इसलिए, श्री भट्ट ब्राह्मणों ने वेद विद्या की व्याख्या की है और उन्हें परम पद प्राप्त हुआ है।
श्रीभट्ट ब्राह्मण वंश सम्बंधित श्लोक का भावार्थ यह है:
“भट्ट ब्राह्मणस्य मुखे शास्त्रं, करे कलम्।
मनसि धर्मः, हृदये ज्ञानं, तद्वद् भट्टः।”
भावार्थ:
श्रीभट्ट ब्राह्मण के मुख में शास्त्र (वेद-विद्या) है, हाथ में कलम (लेखनी) है, मन में धर्म है, और हृदय में ज्ञान है। ऐसा होने से वह सच्चा श्रीभट्ट ब्राह्मण वंश से संबंधित है।
भट्ट का अर्थ : परम विवेक और गुढ़ ज्ञान रखने वाला ही सच्ची संज्ञा को पहचान सकता हैं! भट्ट का वास्तविक अर्थ ‘विद्वान’ अर्थात् प्रकांड पंडित, ज्ञानी से ताल्लुक रखता हैं, भट्ट कोई जाति नहीं अपितु ब्राह्मण वंश की एक सर्वश्रेष्ठ उपाधि है। कहा जाता है कि जब ब्राह्मण वंश के लोग किसी भी विद्या के क्षेत्र में ज्ञान अर्जन कर अभूतपूर्व सफलता को पा लेते थे, तब उन्हें भट्ट नामक उपाधि से सुशोभित किया जाता था। उल्लेखित किया गया है कि ब्रह्म को भलीभांति ढंग से जानने वाला ब्राह्मण जिसे ब्रह्म का ऐसा ज्ञान हो कि वह समाज के साथ उस ज्ञान को बांटने में पूरक हो वह श्रीभट्ट ब्राह्मण वंश के अंतर्गत जाना जाता है।
ब्राह्मण वंश को सुशोभित करने वाले कुछ महत्वपूर्ण श्लोक दिए गए हैं जो श्री भट्ट ब्राह्मण वंश की महानता को दर्शाते हैं:
भारतीय संस्कृति के अति पवित्र महाग्रंथो -वेदों में उल्लेख:
- “भट्टानां विद्याधराणां प्रवराणां प्रवर्त्तकानाम्।
तेषां विद्याप्रसादेन जायते सर्वसम्पत्तिः।”
भावार्थ: श्रीभट्ट ब्राह्मण वंश विद्वानों और विद्या के धारकों के प्रवर्तक हैं। उनकी विद्या की कृपा से हमें सभी सम्पत्तियाँ प्राप्त होती हैं।
भारतीय संस्कृति के पवित्र पुराणों में उल्लेख:
- “भट्टब्राह्मणा वेदविद्या वेदविद्यास्ततः परः।
तस्माद्वेदविद्या प्रोक्ता भट्टब्राह्मणैः परं पदम्।”
भावार्थ: श्रीभट्ट ब्राह्मण वंश वेद विद्या में निपुण हैं और वेद विद्या से भी परे हैं। इसलिए, श्री भट्ट ब्राह्मणों ने वेद विद्या की व्याख्या की है और उन्हें परम पद प्राप्त हुआ है।
प्राचीन भारतीय स्मृतियों में उल्लेख:
- “भट्टानां धर्मशास्त्रेषु प्रावीण्यं प्रसिद्धम्।
तेषां विद्याप्रसादेन लोकः सुखी भवेत्।”
भावार्थ: श्रीभट्ट ब्राह्मण वंश धर्मशास्त्र में पूर्णतः निपुण हैं और उनकी विद्या की कृपा से लोग सुखी होते हैं।
अन्य महत्वपूर्ण श्लोक:
- “श्रीमन्नारायणं नमस्कृत्य नमस्कृत्य नमो नमः।
भट्टब्राह्मणानां विद्याधराणां प्रसादात्।”
भावार्थ: श्रीमन्नारायण को नमन करते हुए, मैं श्रीभट्ट ब्राह्मणों की विद्या की कृपा को नमन करता हूँ।
इन श्लोकों से यह स्पष्ट होता है कि श्री भट्ट ब्राह्मण वंश को वेद विद्या, धर्मशास्त्र और आध्यात्मिक ज्ञान में उनकी महारत के लिए प्राचीनकल से ही सम्मानित किया जाता रहा है।
श्री भट्ट ब्राह्मण वंश को सुशोभित करने वाले कुछ महान व्यक्तित्व :
महृषि ऋचिक के मझले पुत्र शुन: शैप :, (श्राप मुक्ति हेतु सत्यवादी महाराजा हरीशचंद्र जी के द्वारा करवाए जाने वाले यज्ञ के दौरान) जिन्हे परम श्रेध्य परम पूज्य विश्वामित्र के ज्येष्ठ पुत्र होने का गौरव प्राप्त हुआ! और परम पूज्य विश्वामित्र जी ने उनको (शुन: शैप के स्थान पर) देवरात नाम से सुशोभित किया! देवरात अर्थात (देवताओं से रक्षित – नालंदा हिंदी शब्द कोष पृष्ठ संख्या- 616) तथा भारतीय संस्कृति के पवित्र ग्रन्थ – वायु पुराण अध्याय संख्या- 91, श्लोक संख्या : 90 – 115 के मध्य परम श्रेध्य विश्वामित्र जी और परम पूज्य महृषि देवरात जी का संपूर्ण विवरण कौशिक गौत्र सहित स्पष्ट रूप से दर्शाया गया हैं!
भारतीय संस्कृति को सुशोभित करने वाले कुछ महत्वपूर्ण व्यक्तित्व :
- प्रकांड महापंडित रामानुजाचार्य जी
सुपुत्र परम पूजनीय प्रकांड महा
पंडित श्री केशव भट्ट जी (वैष्णव
सम्प्रदाय )! - प्रकांड महापंडित माधवचार्य जी सुपुत्र प्रकांड महापंडित श्री नारायण भट्ट जी (ब्रह्म सम्प्रदाय )
- अखंड बहुमण्डलाचार्य जगतगुरु महाप्रभु वल्लभाचार्य जी सुपुत्र प्रकांड महापंडित श्री लक्ष्मण भट्ट जी (रुद्र सम्प्रदाय )
- प्रकांड महापंडित मधवाचार्य जी सुपुत्र प्रकांड महापंडित श्री मध्यगेह्य भट्ट जी
- प्रकांड महापंडित कुमारिल भट्ट जी सुपुत्र प्रकांड महापंडित यज्ञेश्वर भट्ट जी ( भट्ट सम्प्रदाय )!
- प्रकांड महापंडित विष्णु स्वामी भट्ट जी ( वैष्णव सम्प्रदाय )
- प्रकांड महापंडित गोपाल भट्ट जी (परम श्रेध्य भगवान श्री कृष्ण जी की नगरी आज भी इस वंश से सुशोभित हो रहीं हैं )!
- दुनिया के सर्वश्रेष्ट गणितज्ञ और महान खगोलशास्त्री प्रकांड महापंडित आर्यभट्ट जी और महान गणितज्ञ भास्कराचार्य भट्ट जी ( जिनके नाम से आज भी आकाश में उपग्रह उड़ते हैं ऐसा सम्मान इनसे पहले शायद ही किसी को मिला हो )!
- पंडित बाजीराव पेशवा उर्फ़ बल्लाल भट्ट जी ( मुगलों के खिलाफ भयंकर 41 युद्ध में अपराजित महायोद्धा तथा अटक से कटक तक मराठा साम्राज्य महान विस्तारक )!
- महान वैज्ञानिक डॉक्टर भगवान
नौतम भट्ट जी! (डॉ नौतम भट्ट जी
(१९०९ – २००५) भारत के एक
रक्षा वैज्ञानिक थे। उन्होने भारत
को रक्षा-सामग्री के क्षेत्र में
आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में
महत्वपूर्ण योगदान दिया। अग्नि,
पृथ्वी, त्रिशूल, नाग, ब्रह्मोस, धनुष,
तेजस, ध्रुव, पिनाका, अर्जुन, लक्ष्य,
निशान्त, इन्द्र, अभय, राजेन्द्र,
भीम, मैसूर, विभुति, कोरा, सूर्य
आदि भारतीय शस्त्रों के विकास में
उनका अद्वितीय योगदान रहा।उन्हें
भारत के रक्षा अनुसंधान की नीव
रखने वाला अत्यंत महान वैज्ञानिक
माना जाता है।) - प्रकांड महापंडित बाण भट्ट जी
(संस्कृति की प्रथम गद्य रचना देने
वाले) - प्रकांड महापंडित राजाराम मोहन राय जी – एक उत्कृष्ट समाज सुधारक
- व्याकरण के महान रत्न – महर्षि
पाणिनि जी(अनुज भ्राता पिंगल
भट्ट जी, वंश संबंधित हलायुद्ध भट्ट
जी ) - प्रकांड महापंडित आचार्य चाणक्य जी (दुनिया के सर्वश्रेष्ठ नीतिज्ञ एवं अर्थशास्त्र के परम ज्ञानी )
- नारी सशक्तिकरण की महान
वीरांगना महारानी लक्ष्मी बाई जी,
तथा तात्या टोपे जी इत्यादि!
कुछ परम ज्ञान की बातें :
पंडित पिंगल भट्ट जी :
- पंडित पिंगल भट्ट जी महर्षि पाणिनि जी के छोटे भाई थे।
- उन्होंने छंदशास्त्र पर “छंदसूत्र” नामक ग्रंथ लिखा।
- यह ग्रंथ वेदों में छंदों के नियमों को समझाता है।
- पंडित पिंगल भट्ट जी को छंदशास्त्र का प्रवर्तक माना जाता है।
प्रमुख श्लोक:
“पिंगलस्तु छंदसूत्राणां कर्ता पाणिनिनः अनुजः।”
भावार्थ: पिंगल भट्ट जी महर्षि पाणिनि के अनुज हैं और छंदसूत्र के रचयिता हैं।
पंडित हलायुद्ध भट्ट जी –
- प्रकांड महापंडित हलायुद्ध भट्ट जी, प्रकांड महापंडित पिंगल भट्ट जी के वंशज थे।
- उन्होंने “मिताक्षरा” नामक ग्रंथ लिखा, जो हिंदू धर्म के स्मृति शास्त्र की व्याख्या करता है।
- प्रकांड महापंडित हलायुद्ध भट्ट जी ने परम पूजनीय महर्षि याज्ञवल्क्य स्मृति की व्याख्या की।
- वह एक महान विद्वान और न्यायविद थे।
प्रमुख श्लोक:
“हलायुद्धस्तु मिताक्षराकारः पिंगलस्य वंशजः।”
भावार्थ : हलायुद्ध जी, पिंगल जी के वंशज हैं और मिताक्षरा के रचयिता हैं।
महत्वपूर्ण स्रोत प्राचीन स्रोत :
- महाभारत, 2. पुराण, 3. छंदसूत्र, 4. मिताक्षरा, 5. परम श्रेध्य महापंडित महायोगेश्वर महर्षि याज्ञवल्क्य जी श्रेष्ठ “स्मृति”
इन महान व्यक्तियों ने भारतीय संस्कृति और शास्त्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
यह एक अद्भुत और ऐतिहासिक घटना है कि प्रकांड महापंडित कुमारिल भट्ट जी और परम पूजनीय आदि जगत गुरु शंकराचार्य जी सुपुत्र प्रकांड महापंडित परम श्रेध्य श्री शिवगुरु भट्ट जी, परम श्रेध्य ब्रह्मा जी और परम श्रेध्य ब्रह्म ऋषि वाल्मीकि जी की प्रतिमाएँ कुम्भ मेला प्रयागराज में स्थापित की जा रही है। ये भव्य प्रतिमाएँ न केवल इन महान संतों /व्यक्तित्वों को सम्मानित करने के लिए है, बल्कि यह श्री सत्य सनातन धर्म के प्रति भी एक महत्वपूर्ण श्रेष्ठ कदम है, क्योंकि दुनिया की सबसे अति प्राचीन संस्कृति श्री सत्य सनातन धर्म संस्कृति ही हैं और वैदिक संस्कृत सभी भाषाओं की जननी हैं! परम श्रेध्य प्रकांड महा पंडित कुमारिल भट्ट जी और आदि जगत गुरु शंकराचार्य जी ने हिंदू धर्म और संस्कृति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, और उनकी शिक्षाएं आज भी सारी दुनिया के लिए प्रासंगिक हैं।
प्रकांड महापंडित कुमारिल भट्ट जी का भारतीय संस्कृति में महत्वपूर्ण योगदान:
मीमांसा दर्शन के प्रमुख विद्वान वेदों को अपौरुषेय सिद्ध करने में महत्वपूर्ण योगदान: मीमांसाश्लोकवार्त्तिक के रचयिता!
परम पूजनीय आदि जगत गुरु शंकराचार्य जी का महत्वपूर्ण योगदान:
अद्वैत वेदांत दर्शन के प्रमुख प्रतिपादक
हिंदू धर्म और संस्कृति में महत्वपूर्ण योगदान: परम पूजनीय भारत माता की एकता और अखंडता के लिए राष्ट्र के चारों कोनों में चार अति पवित्र मठों की स्थापना, जो आज भी सारे संसार में अति पवित्र पूजनीय और अत्यंत श्रेष्ठ भारतीय संस्कृति के रूप में अद्भुत, अनमोल और अविस्मरणीय आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं! श्री सत्य सनातन धर्म संस्कृति की सदा जय – परम पूज्य भारत माता जी की सदा जय!
ये अति पवित्र पावन प्रतिमाएँ इन महान संतों / व्यक्तित्वों की शिक्षाओं को प्रसारित करने और श्री सत्य सनातन धर्म को संपूर्ण दुनिया में एक दिव्य ज्योति के रूप में प्रसारित करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, ताकि राष्ट्र की भावी पीढ़ी भी धर्म के मार्ग पर चलकर, अपने इष्ट देव -परम श्रेध्य मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र जी, परम श्रेध्य भगवान श्री कृष्ण जी की अनमोल, अद्भुत और अविस्मरणीय शिक्षाओं को ग्रहण कर सारी दुनिया में परम श्रेध्य भारत माता का नाम विश्व पटल पर स्वर्णिम अक्षरों से अंकित करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाए! जय हिंद-जय भारत – जय भारतीय संस्कृति!
” ब्रह्म परम्परा कभी नष्ट न हो!”
पंडित धर्मराज यज्ञनारायण भट्ट जी
(वेदपाठी -ज्योतिषाचार्य)
लक्ष्मीनगर, मुज़फ्फरनगर!
सर्वे भवन्तु सुखिन :
सर्वे संतु निरामया!
आभार – राकेश कुमार कौशिक जी
(शिक्षविद्द )!
