धर्मों रक्षिति रक्षित :विशेषांक : दीपावली का महोत्सव

भारतीय संस्कृति का अत्यंत महान महापर्व “दीपावली” परम श्रेध्य भगवान श्री रामचंद्र जी की आयोध्या वापसी की खुशी में संपूर्ण विश्व में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। एक चक्रवर्ती सम्राट (परम पूजनीय महाराजा दशरथ जी ) के अत्यंत आज्ञाकारी सुपुत्र होने के साथ साथ, भगवान श्री राम जी की अत्यंत सरल जीवनशैली और उनकी अद्भुत, अविस्मरणीय तथा अनमोल, वैभवशाली वीरता तथा सौम्यता-सभ्यता ने उन्हें पूरी दुनिया का अनमोल रत्न अर्थात् “मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्रीरामचंद्र जी” की महत्वपूर्ण उपाधि से सुशोभित कर दिया! इसीलिए सम्पूर्ण प्राणी जगत आज (पूरी दुनिया) उन्हें बड़ी श्रद्धा के साथ मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्री रामचंद्र जी के नाम से पुकारते हैं!

लंकापति नरेश महाप्राक्रमी विश्व विजेता महाराजा रावण को पारस्त कर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीरामचंद्र जी चौदह वर्ष के अत्यंत कटोर वनवास के बाद आयोध्या नगरी लौटे थे। उनकी वापसी की खुशी में परम पवित्र नगरी आयोध्या नागरिवासियों के लोगों ने दीप जलाए थे।

भारतीय संस्कृति के महापर्व दीपावली के प्रसिद्ध श्लोक:

“श्री रामचंद्र जी की वापसी की खुशी में,
अति पवित्र पावन दीप जलाए जाते हैं।
विश्व अंधकार को दूर भगाने के लिए,
ज्ञान की ज्योति से रोशन करने के लिए।”

“दीपो भवः” अर्थात् दीप से ज्ञान की प्राप्ति होती है!

“तमसो मा ज्योतिर्गमय” अर्थात् अंधकार से प्रकाश की ओर!

“असतो मा सद्गमय” अर्थात् असत्य से सत्य की ओर!

“ज्ञानं परमं बलम्” अर्थात् ज्ञान सबसे बड़ा बल है! सम्पूर्ण प्राणी जगत इस पवित्र पावन दिवस के शुभ अवसर पर भगवान श्री रामचंद्र जी को कोटि कोटि नमन करता हैं! दीपावली के इस पवित्र पावन शुभ अवसर पर संपूर्ण प्राणी जगत उनके आदर्श जीवन से अनमोल शिक्षा ग्रहण कर संपूर्ण विश्व में श्री राम राज्य स्थापित करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता हैं! क्योंकि उनका आदर्श जीवन हर प्राणी को सद्द मार्ग पर चलने की प्रेरणा से परिपूर्ण हैं अनमोल हैं! अविस्मरणीय हैं!
जय श्री राम!जय श्री राम!

दीपावली की शुभकामनाएं:

आपके जीवन में खुशियों का आगमन हो, आपके घर में लक्ष्मी का वास हो,और आपके हृदय में शांति का निवास हो।
श्री सत्य सत्य सनातन धर्म त्यौहारों की अनमोल छवि-श्लोक:

“श्री सत्य सनातन धर्म की महिमा से,
विश्व गुरु भारत भूमि की शोभा बढ़ती है।
पवित्र त्यौहारों की अनमोल छवि से,
हमें जीवन का सही मार्ग मिलता है।”

भारतीय संस्कृति के अनमोल त्यौहार:

मकर संक्रांति – “सूर्य की पहली किरण से, नई ऊर्जा का संचार होता है।”
होली – “रंगों का त्यौहार होली, प्रेम और सौहार्द का संदेश देता है।”
दिवाली अर्थात् दीपावली – “दीपों की जगमगाहट से, दुनिया का अंधकार हटता है।”
जन्माष्टमी – ” श्री कृष्ण जी के जन्म का पर्व, प्रेम और भक्ति का संदेश देता है।”
रक्षा बंधन – “रक्षा बंधन का पवित्र पावन त्यौहार, भाई-बहन के अनमोल प्यार को दर्शाता है।”

इन त्यौहारों की अनमोल छवि हमें सद्द मार्ग की ओर प्रेरित करती हैं:

सत्य की ओर ले जाती है।
प्रेम और एकता का संदेश देती है।
जीवन का सही मार्ग दिखाती है।
मानव आत्मा को रोशन करती है।

श्री सत्य सनातन धर्म त्यौहारों की महिमा को समझने से हमें जीवन के सही मार्ग की ओर ले जाने में मदद मिलती है और जीवन की अनमोल कला रूपी प्रेरणा प्राप्त होती हैं!
सर्वे भवन्तु सुखिन :
सर्वे संतु निरामया!!
“ब्रह्म परम्परा कभी नष्ट न हो!”
पंडित धर्मराज यज्ञनारायण भट्ट जी!
( वेदपाठी – ज्योतिषाचार्य )
आभार – पंडित राकेश कुमार कौशिक जी! (शिक्षविद्द )!

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