खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अनुसार रेस्टोरेंट या ढाबा संचालक के लिए फर्म का नाम, अपना नाम और लाइसेंस नंबर लिखना अनिवार्य है-अशोक बालियान,चेयरमैन,पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशनखाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धारा 31 के अनुसार कोई भी व्यक्ति खाध कारोबार अनुगप्ति के आधीन ही कारोबार करेगा या उसे चलाएगा अन्यथा नहीं। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के अनुसार, प्रत्येक रेस्टोरेंट या ढाबा संचालक के लिए फर्म का नाम, अपना नाम और लाइसेंस नंबर लिखना अनिवार्य है। उनके अनुसार ‘जागो ग्राहक जागो’ योजना के तहत नोटिस बोर्ड पर मूल्य सूची भी लगाना अनिवार्य है।स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय,भारत सरकार के गजट दिनांक 01-08-2011 में एनेक्चर 3 में लाइसेंस की शर्तें के अनुसार सभी खाद्य व्यवसाय संचालक यह सुनिश्चित करेंगे कि उनके खाद्य व्यवसाय के दौरान निम्नलिखित शर्तों का हर समय अनुपालन किया जाए। जिसमे शर्त नम्बर 1 के अनुसार फॉर्म सी में दिए गए लाइसेंस की सत्य प्रति को परिसर में हर समय प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित करेंगे।विपक्ष के साथ ही एनडीए में सहयोगी जदयू, लोजपा (आर) और रालोद ने भी फैसले पर आपत्ति जताई है, जबकि कानून किसी ने देखने की जरूरत नहीं समझी है। जनपद मुज़फ्फरनगर सहित अन्य प्रदेश की पुलिस का यह आदेश किसी धर्म के होटल, रेस्टोरेंट या ढाबा संचालक आदि के लिए नहीं है। पुलिस का यह आदेश खाद्य सुरक्षा अधिनियम2006 के अनुसार रेस्टोरेंट या ढाबा संचालक के लिए फर्म का नाम, अपना नाम और लाइसेंस नंबर लिखना अनिवार्य है, के तहत दिया गया है।कुछ लोग कह रहे है कि इस आदेश से हिंदू-मुस्लिम के बीच दरार बढ़ेगी। खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 का हिंदू-मुस्लिम के बीच दरार बढ़ने से कोई सम्बन्ध नहीं है।यह देश का कानून है, जो खाद्य सुरक्षा के लिए है।हमारा कहना है कि जनता को भ्रमित नहीं किया जाना चाहिए और इस तरह के क़ानूनी विषय में पहले कानून पढना चाहिए। हिंदू-मुस्लिम के बीच दरार वे लोग बढ़ा रहे है, जो बिना कानून पढ़े इस सम्बन्ध में बयान देकर जनता को भ्रमित कर रहे है।

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