[विशेषांक- परम् श्रद्धेय छत्रपति शिवाजी महाराज जी के राज्याभिषेक के बाद अब अयोध्या नगरी- श्रीराम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा कराएंगे महाविद्वान प्रकांड महापंडित गंगा भट्ट जी के वंशज]

श्री सत्य सनातन धर्म नगरी काशी के लिए गौरव की बात है कि अयोध्या में बनकर तैयार नवनिर्मित श्रीराम मंदिर में श्रीराम लला जी के मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा का सारा कर्मकांड तीर्थ नगरी काशी के महाविद्वान प्रकांड महापंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित जी के आचार्यत्व में होगा। इससे भी ज्यादा गौरव और अचरज की बात यह है कि 86 वर्ष के बुजुर्ग परम् श्रद्धेय महाविद्वान प्रकांड महापंडित आदरणीय लक्ष्मीकांत दीक्षित जी के 11 पीढी पहले इनके वंश के प्रकांड महाविद्वान महापंडित परम् श्रद्धेय श्री गागा भट्ट जी (पंडित गंगा भट्ट जी) ने ही लगभग 350 साल पहले महाराष्ट्र जाकर 1674 ई0 में हिंदू हृदय सम्राट छत्रपति शिवाजी महाराज जी का
राज्याभिषेक कराया था। जो हिंदू इतिहास की सबसे गौरवशाली गाथाओं में से एक है। उस दिन छत्रपति शिवाजी महाराज जी का राज्याभिषेक तीर्थ नगरी काशी के महाविद्वान प्रकांड महापंडित तथा वेद-पुराण- उपनिषदों के संपूर्ण ज्ञाता गंगा भट्ट जी द्वारा किया गया। परम् श्रद्धेय प्रकांड महापंडित गंगा भट्ट जी ने ही सिंहासन के ऊपर रत्न-माणिक्य जडित छत्र लगा कर उन्हें “राजा शिव छत्रपति” की उत्कृष्ट उपाधि से सुशोभित किया। सूत्रों के अनुसार खास बातचीत में महाविद्वान प्रकांड महापंडित परम् श्रद्धेय लक्ष्मीकांत दीक्षित जी ने बताया कि परम् पूज्यनीय परम् श्रद्धेय पंडित गंगा भट्ट जी तीर्थ नगरी काशी में अपने समय के बहुत ही बड़े महाविद्वान प्रकांड महापंडित थे। उत्कृष्ट विद्वता के कारण ही वे चहुँओर विख्यात थे। परम् श्रद्धेय लक्ष्मीकांत दीक्षित जी के बेटे आदरणीय पंडित सुनील दीक्षित भट्ट जी ने बताया कि उनके 11 पीढ़ियों का पूरा इतिहास उनको भलीभाँति रूप से पता और परम् श्रद्धेय महाविद्वान प्रकांड महापंडित आदरणीय गंगा भट्ट (पंडित गागाभट्ट जी) हमारे वंश परंपरा के है। काशी से ही विद्वान को बुलावा आने के सवाल पर पंडित सुनील दीक्षित ने बताया कि उस वक्त की परिस्थितियों में वहाँ के विद्वानों में काफी मतभेद था। इसलिए काशी से विद्वान के रूप में महाविद्वान प्रकांड महापंडित आदरणीय गंगा भट्ट जी गए और छत्रपति शिवाजी महाराज जी का राज्याभिषेक श्री सत्य सनातन धर्म संस्कृति के अनुसार वैभवशाली वेद-पुराण – उपनिषदों के गौरवमयी मंत्रों के साथ विधिवत रूप से सम्पन्न कराया ।
परम् श्रद्धेय महाविद्वान प्रकांड महापंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित जी और उनके बेटे सुनील दीक्षित जी ने बताया कि यह दोहरी खुशी की बात है कि हमारी वंश परंपरा के परम् श्रद्धेय महाविद्वान प्रकांड महापंडित गंगा भट्ट जी ने छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक कराया था। और अब उनको मौका मिल रहा है कि जन- जन के प्रिय मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामचंद्र जी के तीर्थ नगरी अयोध्या में श्रीराम लला के मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा का।
अयोध्या नगरी का कार्यक्रम-
अपने परम् पूज्यनीय पिताश्री के साथ श्रीराम लला जी के मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के अति महत्वपूर्ण कर्मकांड में हिस्सा लेने वाले पंडित सुनील दीक्षित जी ने बताया कि, ’16 जनवरी ट्रस्ट की ओर से नियुक्त यजमान द्वारा प्रायश्चित, सरयू नदी के तट पर दशविध स्नान और विष्णु पूजन पंचगव्य प्राशन और गो दान होगा। 17 जनवरी जलयात्रा कलशयात्रा और मूर्ति का नगर भ्रमण। 18 जनवरी विधिवत प्राणप्रतिष्ठा की विधि का आरंभ मध्याह्न के बाद प्रधान संकल्प, गणेश अम्बिका वरुण पूजन, पुण्याहवाचन, मातृका पूजन, नान्दी श्राद्ध, ब्राह्मण वरण, मंडप प्रवेश, वास्तु पूजन, कुटीर कर्म एवं जलाधिवास 19 जनवरी अग्निस्थापन (अरणीय मंथन) द्वारा अग्नि प्राकट्य, नवग्रह स्थापन प्रधान स्थापन एवं होम आदि।’ उन्होंने आगे बताया कि, ’20 जनवरी प्रासाद स्नपन मंदिर का 81 कलशों से स्नान, वास्तु शांति, अन्नाधिवास आदि।
21 जनवरी अन्य पूजन, हवन आदि एवं मूर्ति का दिव्य स्नान लगभग 125 कलशों से, शय्याधिवास एवं मूर्ति न्यास। 22 जनवरी नित्य पूजन और शुभ मुहूर्त में लगभग मृगशिरा नक्षत्र में मध्याह्न काल मे प्राण प्रतिष्ठा महापूजा और पहली महाआरती।’
परम् श्रद्धेय पंडित सुनील दीक्षित जी ने आगे बताया कि, ” परम् श्रद्धेय एवं आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यजमान की भूमिका में रहेंगे और 22 जनवरी को दोपहर 12 से 1 बजे के बीच में मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा शुभ मुर्हूत में करा दी जाएगी। उन्होंने आगे बताया कि संपूर्ण भारतवर्ष से कर्मकांड में 150 विद्वानों के आने की उम्मीद है। जिसमें तीर्थ नगरी काशी धाम से 40-50 हो सकते है। चयन चल रहा है। सभी विद्वान महाविद्वान 15 जनवरी की शाम तक तीर्थ नगरी अयोध्या में जुट जाएगे और अपने कार्य में भी लग जाएगें।” अपनी संस्कृति अपना धाम।
अपना भारतवर्ष महान् ।।
जय हिंद – जय भारत – जय भारतीय संस्कृति।
“ब्रह्म परंपरा कभी नष्ट न हो।”
पंडित धर्मराज यज्ञनारायण भट्ट जी।
( ज्योतिषाचार्य-वेदपाठी )।
मित्राणि धन धान्यानि प्रजानां सम्मतानिव ।जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी ॥
सर्वे भवंतु सुखिन:।
सर्वे संतु निरामया ।।
आभार – पंडित राकेश कुमार कौशिक जी।(शिक्षाविद् )।
लक्ष्मीनगर, मुज़फ्फरनगर ।
