सर्दी जुकाम
सर्दी जुकाम की घटना अनेक चरणों में होती है। हर एक चरण का अलग उपचार होता है। ध्यान से पढ़ें।

- गला दर्द – काली मिर्च नमक में मिलाकर चाटें और उस ओर से निगलें जिस ओर गला दर्द कर रहा है।
- सूखी खांसी- थोड़ा सा अमृतधारा डालकर गर्म पानी पी लें।
- आंख, नाक, कान, गला सब कुछ खुजलाना- आधा चम्मच सोंठ के साथ गर्म पानी पी लें।
- नाक बहने वाला जुकाम- अदरक का रस निकालें और बराबरी से शहद मिलाकर एक एक चम्मच दिन भर में पांच-छह बार ले लें।
- जुकाम के साथ बुखार भी- अन्य उपचारों के अतिरिक्त अजवाइन का उबला पानी ही दिन भर गुनगुना करके पिएं।
- कफ गाढ़ा होने के बाद नाक बंद हो जाना, फेफड़ों में कफ भर जाना- छाती गले पीठ और गर्दन पर अमृतधारा लगाकर सोएं।
नियमित रसाहार अडूसा, गिलोय, तुलसी, ग्वारपाठा, हल्दी।
अधिक कष्ट हो तो पिप्पली चटनी दिन में बार और आवश्यक हो तो रात में भी भी। - नाक और गले से रक्त भी आता हो या पुराना कफ हो, अस्थमा या एलर्जी हो जाए तो लंबे समय तक रसाहार और पिप्पली चटनी दोनों लें।
इन सब स्थितियों में सिर या शरीर गीला रखकर तेज हवा न लगने दें। इनमें से किसी भी अवस्था में दूध या दूध से बने पदार्थ, तले हुए पदार्थ, आइसक्रीम, इमली, कैरी, फास्ट फूड, कोल्ड ड्रिंक या बेकरी पदार्थ अपथ्य हैं। प्रातः देर तक सोने या रात को देर तक जागने से अधिक परेशानी होगी।
खांसी तब अधिक होती है। - जब जुकाम होने वाला हो।
- जब जुकाम होकर ठीक हो गया हो, लेकिन कफ बना हुआ रहे।
- जब आप सुबह देर से उठे और आपकी श्वास नली से स्वाभाविक रूप से सुबह कफ न निकल सके।
उन सबके लिए उपचार - नमक के गरारे करें
- पिप्पली चटनी चाटें।
- ग्वारपाठा का रस लें।
- सोते समय यदि खांसी आए तो थोड़ा सा कत्था मुंह में रखकर चूसते रहें।
- लौंग भूनकर पीसकर चुटकी भर मुंह में रखकर चूसते रहें।
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🪷🪷।। शुभ वंदन ।।🪷🪷
ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः।
सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु।
मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत्॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
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