[विशेषांक: श्री सत्य सनातन धर्म संस्कृति का अति पवित्र पावन महापर्व- नवरात्रि महापर्व महोत्सव]
श्री सत्य सनातन धर्म संस्कृति के अति पवित्र पावन महापर्व महोत्सव- “नवरात्रि महोत्सव ” का महत्व प्रस्तुत पौराणिक श्लोक के अनुसार और भी अत्यंत शुभमंगलकारी
हो जाता है क्योंकि इन पवित्र श्लोकों के बिना हमारी आराधना अधूरी मानी जाती हैंं, इसलिए सच्चे हृदय की सच्ची श्रद्धा के साथ मनन कीजिए और हमेशा-हमेशा परम् सुख की अनुभूति प्राप्त कीजिए। आइए जानते है- संबंधित श्लोक एवं क्षमा प्रार्थना:
संपूर्ण सृष्टि की पालनहार परम् श्रद्धेय माँ दुर्गा जी स्तुति संबंधित पौराणिक श्लोक-
प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयम् ब्रह्मचारिणी।
तृतीयं चंद्रघण्टेति कुष्मांडेति चतुर्थकं॥
पंचमं स्कंदमातेति, षष्टम कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रीति, महागौरीति चाष्टमं॥
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा प्रकीर्तिताः॥
क्षमा प्रार्थना संबंधित पौराणिक श्लोक:
अपराधसहस्त्राणि क्रियन्तेहर्निशं मया।
दासोयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वरि॥
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वरि॥
मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरि।
यत्पूजितं मया देवि परिपूर्णं तदस्तु मे॥
अपराधशतं कृत्वा जगदम्बेति चोच्चरेत।
यां गतिं सम्वाप्नोते न तां बह्मादयः सुराः॥
सापराधो स्मि शरणं प्राप्तस्त्वां जगदम्बिके।
इदानीमनुकम्प्योहं यथेच्छसि तथा कुरु॥
अक्षानाद्विस्मृतेर्भ्रान्त्या यन्नयूनमधिकं कृतम् ॥
तत्सर्वं क्षम्यतां देवि प्रसीद परमेश्वरि॥
कामेश्वरि जगन्मातः सच्चिदानन्दविग्रेहे।
गृहाणार्चामिमां प्रीत्या प्रसीद परमेश्वरि॥
गुह्यातिगुह्यगोप्त्री त्वं गृहाणास्मत्कृतमं जपम्।
सिद्धिर्भवतु मे देवि त्वत्प्रसादात्सुरेश्वरि॥
[समाप्त]
श्री सत्य सनातन धर्म की सदा जय ।
हर-हर-महादेव – जय श्रीराम
सर्वे भवंतु सुखिन।
सर्वे संतु निरामया ।।
“ब्रह्म परंपरा कभी नष्ट न हो”
पंडित धर्मराज यज्ञनारायण भट्ट जी।
( ज्योतिषाचार्य-वेदपाठी )
लक्ष्मीनगर, मुज़फ्फरनगर।
आभार –
पंडित राकेश कुमार कौशिक जी।
( शिक्षाविद् )।
