पेट रोटी से भरता है सम्मान से नहीं

जनपद मुज़फ्फरनगर में आज शिक्षक दिवस पर भी शिक्षकों के अंदर विरोध और आक्रोश यह कैसी विडंबना है । पुरानी पेंशन तो पहले ही शिक्षक और कर्मचारीयों से छीन ली गई थी और अब शिक्षा अधिनियम 1982 की धारा 21 को निरसित कर शिक्षकों की सेवा सुरक्षा को भी समाप्त कर दिया जा रहा है । तो यह स्वाभाविक था कि आज शिक्षक किसी सम्मान को प्राप्त करते हुए ना होकर अपने विद्यालयों में काली पट्टी बांधकर सरकार की नीतियों का विरोध करते नजर आए । शिक्षक जिसे समाज की रीड कहा जाता है वह आज अपनी सेवासुरक्षा के लिए और अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए आंदोलनरत है । जिसका पूर्ण उत्तरदायित्व सरकार की उदासीनता पूर्ण तथा एक तरफा नीतियां है। और शिक्षक तब तक इन नीतियों का विरोध करते रहेंगे जब तक उनकी उचित और न्याय संगत मांगे नहीं मान् ली जाती ।
