
पुराणों में कहा गया है —विप्राणांयत्रपूज्यंतेरमन्तेतत्रदेवता । जिस स्थान पर ब्राह्मणों का पूजन हो वहाँ देवता भी निवास करते हैं। अन्यथा ब्राह्मणोंकेसम्मान के बिना देवालय भी शून्य हो जाते हैं । इसलिए ……. ब्राह्मणातिक्रमोनास्तिविप्रावेदविवर्जिताः ।। श्रीकृष्ण ने कहा – ब्राह्मण यदि वेद से हीन भी हो, तब पर भी उसका अपमान नही करना चाहिए। क्योंकि तुलसी का पत्ता क्या छोटा क्या बड़ा वह हर अवस्था में कल्याण ही करता है।ब्राह्मणोस्यमुखमासिद्…… वेदों ने कहा है की ब्राह्मणविराटपुरुषभगवान के मुख में निवास करते हैं। इनके मुख से निकले हर शब्द भगवान का ही शब्द है, जैसा की स्वयं भगवान् ने कहा है कि ,विप्रप्रसादात्धरणीधरोहमम् विप्रप्रसादात्कमलावरोहम।विप्रप्रसादात्अजिताजितोहम् विप्रप्रसादात्मम्रामनामम्, ब्राह्मणोंके आशीर्वाद से ही मैंने धरती को धारण कर रखा है। अन्यथा इतना भार कोई अन्य पुरुष कैसे उठा सकता है, इन्ही के आशीर्वाद से नारायण हो करमैंने लक्ष्मी को वरदान में प्राप्त किया है, इन्ही के आशीर्वाद से मैं हर युद्ध भी जीत गया और ब्राह्मणोंकेआशीर्वाद से ही मेरा नाम राम अमर हुआ है,अतः ब्राह्मणसर्वपूज्यनीय है। और ब्राह्मणोंकाअपमान ही कलियुग में पाप की वृद्धि का मुख्य कारण है।🌹🙏जय श्री परशुराम🙏🌹

