लेकिन आजकल के शहरी इन सब बातों को फ़िज़ूल समझते हैं उन्हें लगता है कि ये पण्डे सिर्फ लूटने बैठे हैं जबकि ऐसा नही है…
गया यात्रा के दौरान एक मेरे मित्र के पैसे चोरी हो गए थे या गिर गए थे वो बहुत घबरा गया कि घर कैसे जाएगा, कहाँ रहेगा खायेगा आदि, तो पण्डे ने तत्काल पूछा कितने पैसे चाहिए आपको?…
और पण्डे जी ने ना सिर्फ पैसे दिए बल्कि रहने और खाने की व्यवस्था भी करवाई…
ये तीर्थो के पण्डे हमारी सभ्यता,संस्कृति के अटूट अंग है इनका अस्तित्व हमारे पर ही है…
अपनी संस्कृति बचाइए और इन्हें सम्मान दीजिये…

वैसे हिन्दुओ के नागरिकता रजिस्टर हैं ये लोग…
पीढ़ियों के डेटा इन्होंने मेहनत से बनाया और संजोया है…
इन्हें सम्मान दीजिये
पं. अनिल (आनन्द )भट्ट शास्त्री
शिव सेवा समिति मन्दिर सर्कुलर रोड जाट कालोनी मुजफ्फनगर
दूरभाष 6395659946
