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[विशेषांक : अद्वितीय महान क्रन्तिकारी तात्या टोपे जी की गौरवगाथा ]

माँ भारती के अनमोल रत्न परम् श्रद्धेय
तात्या टोपे जी भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के एक अद्भुत एवं अद्वितीय रणनीतिकार तथा अत्यंत कुशल सेनानायक थे। सन् 1857 इस्वी के प्रथम स्वातंत्र्य समर में उनकी भूमिका सबसे महत्त्वपूर्ण; प्रेरणादायक और बेजोड़ थी। माँ भारती के अनमोल रत्न परम् श्रद्धेय तात्या टोपे जी का जन्म महाराष्ट्र में नासिक के निकट पटौदा जिले के येवला नामक गाँव में एक उच्च कुलीन श्रीभट्ट ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिताश्री पंडित पांडुरंग राव भट्ट जी थे। अनमोल क्रांतिकारी तात्या जी का वास्तविक नाम रामचंद्र पांडुरंग राव जी था। अपने आठ भाई-बहनों में माँ भारती के अनमोल रत्न तात्या टोपे जी सबसे बड़े थे।
सन् 1857 के स्वातंत्र्य समर की शुरुआत 10 मई को मेरठ शहर से हुई। जल्दी ही क्रांति की चिनगारी समूचे उत्तर भारत में फैल गई। उस रक्तरंजित और गौरवशाली इतिहास के मंच से अत्यंत महान वीरांगना एवं नारी सशक्तिकरण की बेमिशाल शख्शियत झाँसी की रानी- महारानी लक्ष्मीबाई जी ; नाना साहेब पेशवा भट्ट जी; राव साहब; बहादुरशाह जफर आदि के माँ भारती की सेवा करते करते विदा हो जाने के करीब एक साल बाद तक अनमोल रत्न तात्या जी संघर्ष की कमान सँभाले रहे और ब्रिटिश सेना को छकाते रहे। वे परिस्थिति को देखकर अपनी रणनीति तुरंत बदल लेते थे।
अंतत: परोन के जंगल में महान क्रांतिकारी तात्या टोपे जी के साथ विश्वासघात हुआ। नरवर का राजा मानसिंह अंग्रेजों से मिल गया और उसकी गद्दारी के कारण माँ भारती का सच्चा हीरा तात्या टाइप जी को 8 अप्रैल; 1859 को सोते हुए पकड़ लिया गया । विद्रोह और अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध लड़ने के आरोप में 14 अप्रैल; 1859 को इस अत्यंत महान क्रांतिकारी तात्या टोपे जी को फाँसी दे दी गई। कहते हैं; तात्या फाँसी के चबूतरे पर दृढ़ कदमों से ऊपर चढ़े और फाँसी के फंदे को पुष्प-हार की तरह स्वयं अपनी गरदन में डाल लिया। इस प्रकार तात्या मातृभूमि-हित निछावर हो गए। महान क्रांतिकारी तात्या टोपे जी की यह राष्ट्र प्रेम की अनमोल धारा, राष्ट्र की युवा पीढ़ी को हमेशा हमेशा के प्रेरणास्रोत बनी रहेगी. जय हिंद – जय भारत – जय भारतीय संस्कृति.
“ब्रह्म परम्परा कभी नष्ट न हो!”
पंडित धर्मराज यज्ञनारायण भट्ट जी
( वेदपाठी – ज्योतिषचार्य ).
आभार –
पंडित राकेश कुमार कौशिक जी
(शिक्षाविद ) लक्ष्मीनागर, मुज़फ्फरनगर!

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