विशेषांक : प्रारंभिक शिक्षकों की सूची

पंडित धर्मराज यज्ञनारायण भट्ट जी की कलम से –
लिखित प्रसिद्ध संस्कृत श्लोक- स्मार्तस वेदांत के प्रारंभिक शिक्षकों की सूची उनके क्रम में प्रदान करता है।
नारायणं पद्म-भुवं वसिष्ठं शक्ति – च तत्पुत्रे पाराशरं च!
व्यासम् शुकम गौड़पाद महंतम् गोविंदम् योगिन्द्रम् अथस्य शिष्यम्!
श्री शंकराचार्य मठस्य पद्मपादं च हस्तमालकं च शिष्यम्!
तम् त्रोटकम् वर्तिका कर्मण्यं अस्मद् गुरु-नसंतत्-अमानतोऽस्मि!!
इस श्लोक से हम यह समझ सकते हैं कि सृष्टि के प्रथम शिक्षक स्वयं भगवान श्री नारायण जी हैं और पिताश्री से सुपुत्र होते हुए श्री शुक आचार्य तक की वंशावली है।श्री भगवान नारायण जी से श्री शुक आचार्य तक उत्तराधिकार की रेखा को वंशारसी-परंपरा के रूप में जाना जाता है और श्री गौड़पादाचार्य से संन्यासियों का वंश शुरू होता है और इसे मानव-गुरु-संप्रदाय के रूप में जाना जाता है।
युग के अनुसार आचार्यों को विभाजित करना:
1- सत्य या क्रत युग में:
श्री भगवान नारायण जी, श्री भगवान सदाशिव जी और श्री भगवान ब्रह्मा जी!
2- त्रेता युग में:
(i) परम् श्रेध्य वसिष्ठ महर्षि जी
(ii) परम् श्रेध्य शक्ति महर्षि जी
(iii) परम् श्रेध्य पराशर महर्षि जी!
3- द्वापर युग में:
(i) परम् श्रेध्य वेद व्यास महर्षि जी
(ii) श्री शुक आचार्य जी
4- कलियुग में:
आचार्य श्री गौड़पाद आचार्य जी से प्रारंभ करते हैं और उसके बाद परम् श्रेध्य श्री गोविंदा भगवत्पाद आचार्य जी, परम श्रेध्य आदि जगत गुरु श्री शंकराचार्य जी आदि आते हैं, जिनके परम् चरण कमलों से यह भूमि पावन होती आईं हैं! जय हिन्द – जय भारत – जय भारतीय संस्कृति!
जय श्री राम – जय श्री राम
“ब्रह्म परम्परा कभी नष्ट न हो!”
आभार –
पंडित राकेश कुमार कौशिक जी
लक्ष्मीनगर, मुज़फ्फरनगर!
