जन्मकुण्डली 📜 में जन्म के समय के आकाश में विराजमान ग्रह-नक्षत्रों🪐 की स्थिति का रेखाचित्र वर्णित रहता है। उस जन्म-समय के अनुसार प्राप्त ग्रहयोगों के माध्यम से गुण और दोषों की समीक्षा की जाती है। पितृ दोष मुख्य रूप से एक पितृ-श्राप है। योग्य व विद्वान् ज्योतिषी जन्मकुण्डली को देखकर इस पितृदोष के बारे में बता सकते हैं।

इस दोष के कारण जीवन में बहुत समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जैसे- बाल्यकाल में रोग🤒, शिक्षा📖 में रूकावट, शिक्षा में मन ना लगना, युवावस्था में विभिन्न विषयों के प्रति आसक्ति तथा व्यसन में संलग्नता, योग्यता के अनुरूप नौकरी💼 ना मिलना,अथक प्रयास और संघर्ष करने के बाद भी जीवन का निर्वाह साधारण रूप से होना तथा विवाह में विलम्ब, विवाह के उपरान्त सन्तान प्राप्ति में बाधा, घर-परिवार👪 में कलह, बिना अपराध के न्यायालय🧑⚖️📝 के द्वारा कारावास आदि का दण्ड तथा पारिवारिक सदस्यों की असमय रोग, विष, आत्महत्या अथवा दुर्घटना🤕 आदि विभिन्न कारणों से मृत्यु होना अथवा असाध्य रोगों से ग्रसित होकर लम्बे समय तक बिस्तर पर पड़े रहना आदि अनेक प्रकार के विषय हैं।
इस पूजा के दौरान पितृ गायत्री मंत्र का जाप किया जाता है और आपके पितरों की शान्ति के लिए प्रार्थना🙏 की जाती है। विधि पूर्वक इस पूजा को संपन्न करने से वंशवृद्धि होती है और आपकी आने वाली 7 पीढ़ियों का उद्धार होता है।
पं अनिल भट्ट भारद्वाज
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