- शङ्कराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती 1008

यदि कही सत्कर्म हो रहा हो तो उसमें सहयोग करना चाहिए और यदि कोई दुष्कर्म कर रहा हो तो उसे रोकना चाहिए। यदि कोई सत्कर्म करने वाले को रोकता है तो उसे पाप लगता है। सत्कर्म में सहयोग करने वाले को पुण्य और दुष्कर्म में सहयोग करने वाले को पाप लगता है।
उक्त बातें परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ‘1008’ ने चातुर्मास्य प्रवचन के अन्तर्गत भुवनकोश कथा में कही।
उन्होंने कहा कि जब भगवान् विष्णु वामन का रूप बनाकर राजा बलि के पास तीन पग भूमि लेने को आए तो दान करने को उद्यत राजा बलि को दैत्यगुरु शुक्राचार्य ने रोका। दानरूपी सत्कर्म से रोकने के कारण उनकी एक ऑख फूट गयी थी।
आगे कहा कि भगवान् को अनन्त कहा गया है और भगवान् ने जिस ब्रह्माण्ड को निर्मित किया है उसकी भी महिमा अनन्त है। जब पुराणों में वर्णित इन अद्वितीय बातों का आप अध्ययन करेंगे तो आपको अपने ब्रह्माण्ड, अपने जम्बूद्दीप और अपने भारतवर्ष पर गर्व होगा।
पुनः कहा कि सभी विद्याएं भारत की ही हैं। भारत से ही लोग इन विद्याओं को बाहर ले गये और भारत के लोग यह समझने लगे कि विद्या भारत के बाहर से आई है।
पूज्य शङ्कराचार्य जी ने इस ब्रह्माण्ड की उनेक विशेषताओं को बताते हुए कहा कि हमारे इसी ब्रह्माण्ड में गंगा प्रवाहित होती है। जब भगवान् वामन ने अपना स्वरूप त्रिविक्रम बना लिया तो उनके पैर के अंगूठे से ब्रह्माण्ड कटाह में छेद हो गया और उसी से ब्रह्मद्रव गंगा प्रवाहित होने लगी। अन्य किसी ब्रह्माण्ड में गंगा नहीं है।
पूज्यपाद शङ्कराचार्य जी के प्रवचन के पूर्व
परम पूज्य शङ्कराचार्य जी महाराज भागवत कथा पंडाल पर पहुंचे जहाँ पर संस्कृत विद्या पीठ गुरुकुल एवं बनारस में अध्ययनरत छात्रों के द्वारा पूज्य शंकराचार्य जी महाराज का हर हर महादेव एवं जय गुरुदेव के जयघोष के साथ स्वागत किया पूज्य महाराजा श्री, ने मंच पर पहुंचते ही, सर्वप्रथम ब्रह्मलीन जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के, तैल चित्र पर पूजन अर्चन किया उसके उपरांत वह व्यास पीठ पर आसीन हुए जहां पर आज श्री मद भागवत कथा के यजमान रहे, श्री चंद्र प्रकाश उपाध्याय (कवर्धा), रुपेश अग्रवाल श्रीमती सिंपल अग्रवाल, (बिलासपुर छत्तीसगढ़) श्रीमती को कुशला दुबे रहे जिहोंने पादुका पूजन भी किया
वही आकाशवाणी कलाकार संदीप तिवारी, शिवानी अवस्थी, रामबालक बैध,चंदन यादव एंड पार्टी कंजई के दुआरा भजनों की प्रस्तुति की गई वही गुरुकुल के छात्र त्रिगुड़ तिवारी,कुलदीप पाण्डे ने भजन गाया
मंच पर प्रमुख रूप से, शंकराचार्य महाराज की निजी सचिव चातुर्मास्य समारोह समिति के अध्यक्ष *ब्रह्मचारी सुबुद्धानन्द जी, ज्योतिष्पीठ पण्डित आचार्य रविशंकर द्विवेदी शास्त्री जी, गुरुकुल संस्कृत विद्यालय के उप प्राचार्य पं राजेन्द्र शास्त्री जी, दंडी स्वामी श्री अमरिसानन्द जी महाराज,पं,राजकुमार तिवारी,हीरालाल दुबेदी,आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। मंच का संयोजन *श्री अरविन्द मिश्र* एवं संचालन ब्रह्मचारी ब्रह्मविद्यानन्द जी ने किया, परमहंसी गंगा आश्रम व्यवस्थापक सुंदर पांडे ।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से पंडित आनंद तिवारी सोहन तिवारी पं सुनील शर्मा रघुवीर प्रसाद तिवारी राजकुमार तिवारी,दीपक शुक्ला,अमित तिवारी
बसंत पांडे,राघवेंद्र राजपूत, लक्ष्मी नारायण तिवारी, बिमलेश राजपूत, आशीष तिवारी केजरीवाल जी,सोनेलाल पटैल,, के पी गर्ग,भगवान दास पटैल,राम सजीवन शुक्ला जी,मनोज यादव,बद्री चौकसे,नारायण गुप्ता ,जगदीश तिवारी,अरविंद पटैल, अजय विश्कर्मा,रामकुमार तिवारी,सत्येंद्र मेहरा,कपिल नायक सहित श्री मद भागवत पुराण का रस पान करने बड़ी संख्या में गुरु भक्तों की उपस्थिति रही सभी ने कथा का रसपान कर अपने मानव जीवन को धन्य बनाया भागवत भगवान की कथा आरती के उपरांत महाभोग प्रसाद का वितरण किया गया
