श्री सत्य सनातन धर्म संस्कृति- अनमोल, अद्वितीय, अद्भुत और अविस्मरणीय श्लोक- “गायत्री: मंत्र” एवं ॐ महिमा:

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यम् भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥
भावार्थ : “ॐ” मैं उस दिव्य आत्मा की पूजा करता हूँ जो तीनों लोकों को प्रकाशित करती है- भौतिक, सूक्ष्म और कारणात्मक; मैं उस ईश्वर को अपनी प्रार्थनाएँ अर्पित करता हूँ जो सूरज की तरह चमकता है। वह हमारी बुद्धि को प्रबुद्ध (परम् विवेक में) जाग्रत करें। यह मंत्र सभी मंत्रों में सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। जो प्राणी इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करते हैं, उनका तेज विकसित होता है। परम् विवेक बुद्धि- यह मंत्र तन और मन दोनों को स्वस्थता प्रदान करता है सफलता, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक ज्ञान…
ॐ = “ओ३म” यानी प्रणव या “ओंकार” मंत्र के समान; भूर्भुवः = पृथ्वी और पृथ्वी के ठीक ऊपर का संसार;
स्वः = अपना;
तत्सवितुर्वरेण्यं = वह सर्वोत्कृष्ट सूर्य रूपी महान् पुरुष;
भर्गो = उत्कृष्ट चमक;विशिष्ट चमक; अद्भुत प्रतिभा;
देवस्य = परम् श्रद्धेय श्री भगवान का;
धीमहि = सच्चे हृदय से ध्यान कर सकते हैं;
धियो= परम् विवेक अर्थात् बुद्धि और मन;
धीह: सच्चे मन से गाओ.;
यो = वह जो;
नः = हमें; हमें या हमारे को; प्रचोदयात् = प्रेरणा; प्रज्वलित करना; प्रबल इच्छा; प्रेरित करना।
“ॐ” के उच्चारण के शारीरिक, मानसिक, चमत्कारिक लाभः
अनेक बार “ॐ” का उच्चारण करने से पूरा शरीर तनाव-रहित हो जाता है। अगर आपको घबराहट या अधीरता होती है तो “ॐ” के उच्चारण से उत्तम कुछ भी नहीं।यह शरीर के विषैले तत्त्वों को दूर करता है, अर्थात तनाव के कारण पैदा होने वाले द्रव्यों पर नियंत्रण करता है। यह हृदय और ख़ून के प्रवाह को संतुलित रखता है। इससे पाचन शक्ति तेज़ होती है तथा
जीवन जीने की शक्ति और दुनिया की चुनौतियों का सामना करने का अपूर्व साहस मिलता है। इसे करने वाले निराशा और गुस्से को जानते ही नहीं। प्रकृति के साथ बेहतर तालमेल और नियंत्रण होता है। परिस्थितियों को पहले ही भांपने की शक्ति उत्पन्न होती है। आपके उत्तम व्यवहार से दूसरों के साथ सम्बन्ध उत्तम होते हैं। शत्रु भी मित्र हो जाते हैं। जीवन जीने का उद्देश्य पता चलता है जो कि अधिकाँश लोगों से ओझल रहता है।
“ॐ” का वैज्ञानिक महत्त्व:
प्रसिद्ध वैज्ञानिक आइंस्टाइन जी यही कह कर गए हैं कि ब्राह्मांड फैल रहा है। ख्याति- प्राप्त वैज्ञानिक आइंस्टाइन से पूर्व परम् श्रद्धेय श्री भगवान महावीर जी ने कहा था। महावीर जी से पूर्व वेदों में भी इसका उल्लेख मिलता है। परम् पूज्य महावीर जी ने वेदों को पढ़कर नहीं कहा, उन्होंने तो ध्यान की अतल गहराइयों में उतर कर देखा तब कहा।खगोल वैज्ञानिकों ने प्रमाणित किया है कि हमारे अंतरिक्ष में पृथ्वी मण्डल, सौर मण्डल, सभी ग्रह मंडल तथा अनेक आकाशगंगाएं, लगातार ब्रह्मांड का चक्कर लगा रही हैं। ये सभी आकाशीय पिंड कई हज़ार मील प्रतिसेकेंड की गति से अनंत की ओर भागे जा रहे हैं, जिससे लगातार एक कंपन, एक ध्वनि अथवा शोर उत्पन्न हो रहा है इसी ध्वनि को हमारे महान् तपस्वी और परम् श्रद्धेय ऋषि–मुनि, महर्षियों ने अपनी ध्यानावस्था में सुना। जो लगातार सुनाई देती रहती है शरीर के भीतर भी और बाहर भी। हर कहीं, वही ध्वनि निरंतर जारी है और उसे सुनते रहने से मन और आत्मा शांति महसूस करती है तो उन्होंने उस ध्वनि को नाम दिया ब्रह्मानाद अथवा “ॐ” कहा। यानी अंतरिक्ष में होने वाला मधुर गीत “ॐ” अर्थात् ‘ओ३म्’ ही अनादिकाल से अनन्त काल तक ब्रह्माण्ड में व्याप्त है। “ॐ” की ध्वनि या नाद ब्रह्मांड में प्राकृतिक ऊर्जा के रूप में फैला हुआ है जब हम अपने मुख से एक ही सांस में “ॐ” का उच्चारण मस्तिष्क ध्वनि अनुनाद तकनीक से करते हैं तों मानव शरीर को अनेक लाभ होते हैं और वह असीम सुख, शांति व परम् आनंद की अनुभूति करता है। “ॐ” को लेकर प्रसिद्ध प्रोफ़ेसर मार्गन कहते हैं कि शोध में यह तथ्य पाया कि “ॐ” का जाप अलग- अलग आवृत्तियों और ध्वनियों में दिल और दिमाग के रोगियों के लिए बेहद असर कारक है, यहाँ एक बात बेहद गौर करने लायक़ यह है जब कोई मनुष्य “ॐ” का जाप करता है तो यह ध्वनि जुबां से न निकलकर पेट से निकलती है यही नहीं “ॐ” का उच्चारण पेट, सीने और मस्तिष्क में कंपन पैदा करता है विभिन्न आवृतियो (तरंगों) और “ॐ” ध्वनि के उतार चढ़ाव से पैदा होने वाली कंपन क्रिया से शरीर में मृत कोशिकाओं को पुनर्जीवित कर देता है तथा नई कोशिकाओं का निर्माण करता है रक्त विकार होने ही नहीं पाता। मस्तिष्क से लेकर नाक, गला, हृदय, पेट और पैर तक तीव्र तरंगों का संचार होता है। रक्त विकार दूर होता है और शरीर में स्फुर्ती बनी रहती है। यही नहीं आयुर्वेद में भी ॐ के जाप के चमत्कारिक प्रभावों का वर्णन है। इस तरह के अनेक प्रयोगों के पश्चात भारतीय आध्यात्मिक प्रतीक चिह्नों को, के प्रति पश्चिम देशों के लोगों में भी खुलापन देखा गया। अभी हाल ही में विश्वविख्यात हारवर्ड विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध प्रोफ़ेसर हारबर्ट बेन्सन जी ने अपने लबे समय के शोध कार्य के बाद “ॐ” के वैज्ञानिक आधार पर प्रकाश डाला है। थोड़ी प्रार्थना और ॐ शब्द के उच्चारण से जानलेवा बीमारी एड्स के लक्षणों से राहत मिलती है तथा बांझपन के उपचार में दवा का काम करता है। इसके अलावा आप स्वयं ॐ जाप करके ॐ ध्वनि के परिणाम देख सकते हैं। इसके जप से सभी रोगों में लाभ व दुष्कर्मों के संस्कारों को शमन होता है। अतः ओ३म् की चमत्कारिक ध्वनि का उच्चारण (जाप) यदि मनुष्य अटूट श्रद्धा व पूर्ण विश्वास के साथ करे तो अपने लक्ष्य को प्राप्त कर जीवन को सार्थक कर सकता है।
सर्वे भवंतु सुखिनः।
सर्वे संतु निरामया ।।
श्री सत्य सनातन धर्म की सदा जय ।
“ॐ” हरि “ॐ”!
हर-हर-महादेव ।
“ब्रह्म परंपरा कभी नष्ट न हो!”
पंडित धर्मराज यज्ञनारायण भट्ट जी ।
(ज्योतिषाचार्य-वेदपाठी )।
आभार- पंडित राकेश शर्मा जी।( शिक्षाविद् )।
