धर्म-संसारः धर्मो रक्षति रक्षितः

[वर्तमान समय में देश-भेद के अनुसार ब्राह्मण वंश के दो प्रमुख विभाग एवं ब्राह्मण वंश के अंतर्विभाग]

“सारस्वता: कान्यकुब्जा गौड़ा उत्कल मैथिला :। 
पन्चगौडा इति ख्याता विन्ध्स्योत्तरवासिनः।।
कर्णाटकाश्च तैलंगा द्राविडा महाराष्ट्रकाः।
गुर्जराश्चेति पञ्चैव द्राविडा विन्ध्यदक्षिणे॥” 

1- पंचगौड ब्राह्मण वंश
2- पंचद्रविण ब्राह्मण वंश

पश्चिम क्षेत्र के अंतर्गत अफ़ग़ानिस्तान का गोर देश, पंजाब- जिसमें कुरुक्षेत्र 
सम्मिलित है, गोंडा- बस्ती शहर, तीर्थ क्षेत्र प्रयागराज के दक्षिण व आसपास का प्रदेशीय क्षेत्र, पश्चिम बंगाल, ये पाँचों प्रदेश किसी न किसी समय पर गौड़ कहे जाते रहे। इन्हीं पाँचों प्रदेशों के नाम पर सम्भवत: सामूहिक नाम ‘पंच गौड़’ (अर्थात् पंच गौड़ ब्राह्मण वंश) आदि गौड़ों का उद्गम कुरुक्षेत्र है। इस प्रदेश के ब्राह्मण विशेषत: गौड़ ब्राह्मण कहलाये। कश्मीर और पंजाब क्षेत्र के ब्राह्मण सारस्वत ब्राह्मण, कन्नौज क्षेत्र के आस-पास के ब्राह्मण कान्यकुब्ज, मिथिला क्षेत्र के आस-पास के ब्राह्मण मैथिल तथा उत्कल क्षेत्र के आस-पास के ब्राह्मण उत्कल कहलाये हैं। नर्मदा के दक्षिणस्थ आन्ध्र, द्रविड़, कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुर्जर, इन्हें ‘पंच द्रविड ब्राह्मण’ कहा गया है। वहाँ के ब्राह्मण इन्हीं पाँच नामों से प्रसिद्ध हैं।

ब्राह्मण वंश के अन्तर्विभाग:

ब्राह्मण वंश के अंतर्गत उपर्युक्त दसों के अनेक ब्राह्मण वर्ग अन्तर्विभाग हैं। ये सभी या तो स्थानों के नाम से प्रसिद्ध हुए, या वंश के किसी पूर्व पुरुष के नाम से प्रख्यात, अथवा किसी विशेष उपाधि, विद्या या गुण के कारण नामधारी हुए।
स्थानवाचक- बड़नगरा, विशनगरा, भटनागर, नागर, माथुर, मूलगाँवकर इत्यादि स्थानवाचक नाम हैं।
वंश के परम् श्रद्धेय पूज्य पूर्व पुरुष के नाम से, जैसे-

  1. शाण्डिल्य (सान्याल)
  2. नारद 
  3. वशिष्ठ
  4. कौशिक
    5.  भारद्वाज
  5. कश्यप, 
  6. गोभिल ये नाम वंश या
    गोत्र के सूचक हैं।

उपाधि के नाम से, जैसे-

  1. चक्रवर्त्ती वन्द्योपाध्याय
  2. मुख्योपाध्याय
  3. भट्ट
  4. फडनवीस
  5. कुलकर्णी
  6. राजभट्ट
  7. जोशी(ज्योतिषी)
  8. देशपाण्डे इत्यादि।

विद्या के नाम से , जैसे-

  1. चतुर्वेदी
  2. त्रिवेदी
  3. शास्त्री
  4. पाण्डेय
  5. व्यास
  6. द्विवेदी इत्यादि।

कर्म या गुण के नाम से , जैसे- 1. दीक्षित

  1. सनाढय
  2. सुकुल
  3. अधिकारी
  4. वास्तव्य
  5. याजक
  6. याज्ञिक
  7. नैगम
  8. आचार्य
  9. भट्टाचार्य
  10. दूबे, इत्यादि।

ब्राह्मणों को सम्पूर्ण भारतवर्ष में विभिन्न उपनामों से जाना जाता है, जैसे- पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी उत्तरप्रदेश, उत्तरांचल, दिल्ली, हरियाणा व राजस्थान के कुछ भागों में- राय, राय साहब, शर्मा, राव, त्यागी, अवध (मध्य उत्तर प्रदेश) तथा मध्य प्रदेश में बाजपेयी, बिहार व बंगाल में भूमिहार, जम्मू- कश्मीर, पंजाब व हरियाणा के कुछ भागों में महियाल, मध्य प्रदेश व राजस्थान में गालव, भट्ट-मेवाड़, गुजरात में अनाविल, महाराष्ट्र में राव, चितपावन एवं कार्वे, कर्नाटक में अयंगर एवं हेगडे, केरल में नम्बूदरीपाद, तमिलनाडु में अयंगर एवं अय्यर, आंध्र प्रदेश में नियोगी, राय जी, राव साहब एवं राव तथा उड़ीसा में दास एवं मिश्र आदि बिहार में मैथिल ब्राह्मण आदि। ब्राह्मण वंश के अंतर्गत कुछ महत्वपूर्ण उल्लेखनीय नाम जिनके सम्मुख आज प्राणी जगत बड़ी श्रद्धा से नतमस्तक हैं – महान् ज्योतिषाचार्य, महान् गणितज्ञ, खगोलशात्री महर्षि आर्यभट्ट जी, महान् गणितज्ञ ज्योतिर्विद् भास्कराचार्य जी, अत्यंत महान् विशिष्ट ज्योतिर्विद् -गणितज्ञ एवं खगोलशात्री वराहमिहिर जी, अखंड भूमंडलाचार्य महाप्रभु स्वामी वल्लभाचार्य दीक्षित जी “भट्ट”, आदि जगतगुरु शंकराचार्य जी, महाविद्वान प्रकांड महापंडित बाणभट्ट जी, परम् पूज्य व परम् श्रद्धेय श्री रामानुजाचार्य जी, वात्सल्य रस के महान् सम्राट महाकवि सूरदास जी, प्रकांड महापंडित महाविद्वान महाकवि तुलसीदास जी, परम् श्रद्धेय श्री विष्णु स्वामी जी “भट्ट”, महाविद्वान प्रकांड महापंडित गोपाल भट्ट गोस्वामी जी, पंडित राजा राममोहन राय जी, परमपूज्य मध्वाचार्य जी, परम् श्रद्धेय व पूज्यनीय महर्षि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी …
हम सभी आभारी हैं, उन सभी सप्तर्षियों, ऋषि-मुनियों के जिन्होंने अपने अद्भुत, अद्वितीय और अविस्मरणीय कार्यकलापों, सर्वोत्तम व उत्कृष्ट संस्कृति से संपूर्ण विश्व को सदा-सदा के लिए चहुँओर रोशन कर दिया।
ॐ श्री सत्य सनातन धर्म की सदा जय।
हर-हर-महादेव। जय श्रीराम।
“ब्रह्म परंपरा कभी नष्ट न हो!”
पंडित धर्मराज यज्ञनारायण भट्ट जी ।
(ज्योतिषाचार्य-वेदपाठी )।

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