देवभूमि उत्तराखंड ये है अभी कुछ दिन पहले भारती अपनी गाय – बकरी चराने जंगल गई थी तभी एक बाघ की कहानी ने अचानक अपने बकरी के बच्चे को पकड़ लिया। ऐसे में भारती ने बिना डरे पहले बाघ से बकरी के बच्चे को निकालने की कोशिश की, जबकि दूसरी तरफ से बाघ उसे खींचकर ले जा रहा था। उसने मुझे बताया कि सर जब बाघ ने बकरी को भी नहीं छोड़ा तो मैंने बाघ को पत्थर मार दिया और बकरी के बच्चे को उसके बचपन से प्रेरित कर दिया। जंगली शिकारी जानवर अपने शिकार को लेकर कितने खूंखार होते हैं ये हम सबको पता है। पर बोलो इतना कर भारती हँसने लगी जैसे ये सब सामान्य सी बात हो। जब भारती ने मुझे ये बात बताई तो वो शर्म के मारे भी नहीं बता रही थी। मैं सोच रहा था कि इतनी शर्मीली लड़की इतनी सी उम्र में इतनी बहादुरी से एक बकरी के बच्चे के लिए बाघ की सैर कर रही थी। हालाँकि वो बकरी का बच्चा कुछ ही समय बाद मर गया क्योंकि उसके गले पर बाघ के पंजे और नाक से घाव हो गए थे। लेकिन जिस

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