सम्पत्ति वाले शिष्य को ही मिलता है ज्ञान

ज्योतिष्पीठाधीश्वर शङ्कराचार्य जी महाराज

सद्गुरु अपने शिष्य की सम्पत्ति देखते हैं और जिसके पास वह सम्पत्ति होती है उसी को ज्ञान का उपदेश करते हैं। जिस प्रकार लोक में आजकल सम्मान पाने के लिए लौकिक सम्पत्ति महत्वपूर्ण मानी जाती है वैसे ही ज्ञान के क्षेत्र में भी शिष्य के पास षट् सम्पत्ति का होना अत्यन्त आवश्यक है। जिसके पास ये छः सम्पत्ति होती है सद्गुरु उसी को ज्ञान का उपदेश करते हैं।

उक्त बातें परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ‘1008’ ने कही।

उन्होंने कहा कि नित्यानित्यवस्तुविवेक माने इस संसार में सदा जो रहे उसे नित्य और जो सदा न रहे उसे अनित्य कहते हैं। शिष्य को इस बात का विवेक होना चाहिए कि वह संसार में नित्य और अनित्य का भेद कर सके। इसी प्रकार इहामुत्रार्थफलभोगविराग। इसका अर्थ है इस लोक और परलोक के फल की इच्छा से वैराग्य हो जाए। इसी प्रकार से शमादिषट्कसम्पत्तिः। शम माने मन का निग्रह, दम माने इन्द्रिय निग्रह, उपरति माने भोगों से विरक्ति, तितिक्षा माने द्वन्द्व को सहने की क्षमता, श्रद्धा माने गुरु और वेदान्त वाक्यों में पूर्ण विश्वास तथा मुमुक्षा माने मुक्त होने की इच्छा। जिस शिष्य के पास ये सारी सम्पत्ति होती है सद्गुरु उसे ज्ञान का उपदेश देते हैं और ऐसे शिष्य को जब उपदेश दिया जाता है तो तत्काल वह ज्ञानवान् हो जाता है।

आगे कहा कि आध्यात्मिक व्यक्ति स्वर्ग की कामना नहीं करते। क्योंकि उनको यह पता होता है कि पुण्य क्षीण होने पर स्वर्ग से नीचे आना पडता है। इसलिए बुद्धिमान् लोग स्वर्ग की कामना छोड़कर मोक्ष की इच्छा करते हैं।
पूज्य महाराज श्री की कथा प्रारंभ होने के पूर्व नियमानुसार पादुका पूजन खजांची परिवार एवं बंटी अग्रवाल के द्वारा किया गया जो कि आज की कथा के यजमान भी रहे

प्रमुख रूप से चातुर्मास्य समारोह समिति के अध्यक्ष व निजी सचिव ब्रह्मचारी सुबुद्धानन्द जी, ज्योतिष्पीठ पण्डित आचार्य रविशंकर द्विवेदी शास्त्री जी, ऋषिकेश संस्कृत विद्यालय के उप प्राचार्य पं राजेन्द्र शास्त्री जी, ब्रह्मचारी निर्विकल्पस्वरूप जी आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। मंच का संयोजन श्री अरविन्द मिश्र एवं संचालन ब्रह्मचारी ब्रह्मविद्यानन्द जी ने किया।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से ज्योतिष पीठ के सीईओ चंद्र प्रकाश उपाध्याय पंडित देवदत्त दुबे अन्नू भैया सुनील शर्मा सोहन तिवारी माधव शर्मा रघुवीर प्रसाद तिवारी रामकुमार तिवारी पंडित आनंद उपाध्याय बद्री चौकसे नारायण गुप्ता टिंकू अग्रवाल लक्ष्मी नारायण तिवारीअरविंद पटेल कपिल नायक सहित बड़ी संख्या में गुरु भक्तों की उपस्थिति रही हैै कार्यक्रमके उपरांत प्रसाद का वितरण किया गया

चातुर्मास्य के अवसर पर पूज्य शङ्कराचार्य जी महाराज का गीता पर प्रवचन प्रातः 7.30 से 8.30 बजे तक भगवती राजराजेश्वरी मन्दिर में होता होता है जिसका प्रसारण 1008.Guru इस यू ट्यूब चैनल पर प्रतिदिन होता है।

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