सांसद निधि ओर विधायक निधि योजना बनने के बाद सियासत में भ्रष्टाचार बढ़ा है प्रमुख समाजसेवी तथा वीरेन्द्र वर्मा विचार मंच के संयोजक पंडित उमादत्त शर्मा ने कहा है कि पुराने समय में निर्वाचित जनप्रतिनिधि भ्रष्टाचार का आरोप लगने मात्र से घबरा जाया करते थे परन्तु 1994से जब से सांसद निधि योजना देश में लागू हुई तथा उसके बाद आहिस्ता आहिस्ता सभी प्रदेशों में विधायक निधि योजना बनी जब से राजनेताओं मे कमीशनखोरी की प्रवृति बढ़ती जा रही है शुरू में सांसद निधि 1करोड थी अब पांच करोड़ हो गई है विधायक निधि भी बढ़ते पांच करोड़ तक पंहुच गई है शुरू में दो या तीन प्रतिशत कमीशन से लेकर आज सांसद विधायक खुलेआम पच्चीस से तीस प्रतिशत कमीशन खा रहे हैं बहुत कम जनप्रतिनिधि ऐसे हैं जो कमीशनखोरी से दूर है वरना अधिकांश धड़ल्ले से ले रहे हैं सरकार चाहे किसी भी दल की हो यह कार्यक्रम निरन्तर जारी है निधि का धन बढ़वाने मे सभी दल एक मत हो जाते है केवल एक सांसद वरुण गांधी को छोड़कर आज तक किसी ने भी इसके खिलाफ आवाज नहीं उठाई है इस काम मे अंधाधुंध कमाई को देखकर ही गुंडे ओर माफिया राजनीति में आरहे है जनप्रतिनिधि यो के भ्रष्टाचार मे लिप्त होने के कारण अधिकारी लोग भी बे हिचक निर्माण कार्य मे कमीशन इस प्रकार मांगते हैं जैसे ये उनका कानूनी अधिकार हो कोई भी राजनीतिक दल इस कमीशनखोरी के विरुद्ध आवाज नहीं उठाता क्योंकि हमाम मे सब नंगे है।

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